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बेवक्त की थकान समय रहते दें ध्यान

20 से 30 की उम्र के युवाओं में थकावट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। क्या थकावट के कारण मनोवैज्ञानिक हैं?  लोग आलसी हैं या फिर यह सिर्फ बहानेबाजी है?  थकान कई कारणों से हो सकती है। कई बार ये कारण स्पष्ट भी नहीं होते,  इसलिए चिकित्सक से संपर्क करने में देर न करें।


कितनी ही बार लोगों से सुनने को मिलता है कि मैं व्यायाम नहीं कर सकता,  बहुत थकावट हो जाती है या फिर  थकावट के कारण किसी काम में मन नहीं लगता। हैरत की बात यह है कि ऐसा कहने वाले 50 से 60 साल की उम्र वाले लोग नहीं होते,  बल्कि 20 से 30 की उम्र वाले युवाओं में थकान के मामले गंभीर रूप से बढ़ रहे हैं। कई बार थकान के ये कारण स्पष्ट नहीं होते,  इसलिए चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी हो जाता है। यहां कुछ सामान्य कारणों के बारे में बताया जा रहा है,  साथ ही यह भी कि इनसे बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं। 

नींद पूरी न करना
बहुत कम नींद लेना सेहत और एकाग्रता दोनों पर असर डालता है। आदर्श स्थितियों में एक वयस्क को रात में कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। शहरी जीवनशैली के बीच शरीर की इस सबसे आसान व प्राकृतिक जरूरत को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है।

क्या करें:  सोने का नियमित समय बनाएं। लैपटॉप,  फोन,  टेलीविजन एक निश्चित समय के बाद बंद कर दें। रात में खाना लेट न खाएं। अगर फिर भी समस्या बनी हुई है तो डॉक्टर से मिलें। यह स्लीप डिसॉर्डर हो सकता है। 

स्लीप ऐप्नी
कई बार लोगों को लगता है कि वे भरपूर नींद ले रहे हैं,  पर असलियत में वे स्लीप ऐप्नी के शिकार होते हैं,  जिससे नींद की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। इससे रात में नींद बार-बार टूटती है। ऐसा सांस लेने में बाधा आने के कारण होता है,  जो कई बार इतने कम समय के लिए होती है कि व्यक्ति को पता ही नहीं चलता। पर नतीजे के रूप में नींद पूरी नहीं होती,  भले ही निर्धारित घंटों से अधिक की नींद ले रहे हों।

क्या करें:  यदि दोपहर में ऊंघते रहते हैं या गाड़ी चलाते समय नींद आने लगती है तो डॉक्टर से मिलें। वे आपको स्लीप ऐप्नी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।

एनीमिया
पीरियड्स के दौरान रक्तस्राव के कारण महिलाओं में लौह-तत्व यानी आयरन की कमी हो जाती है। हालांकि महिलाओं में खून की कमी का यह बड़ा कारण है,  इसके बावजूद इस पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता।

क्या करें:  खून में लौह-तत्व की कमी के कारण एनीमिया होने पर तीन माह तक आयरन सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दी जाती है। लौह-तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे चिकन,  मछली,  शेलफिश,  बींस और गुड़ का अधिक सेवन करना भी आयरन की कमी को पूरा करता है।

हाइपोथाइरॉएडिज्म
थाइरॉएड एक ऐसी ग्रंथि है,  जो मेटाबॉलिज्म को काबू में रखती है। मेटाबॉलिज्म वह प्रक्रिया है,  जिसके तहत शरीर भोजन को पचा कर ऊर्जा में बदलता है। जब यह ग्रंथि असक्रिय हो जाती है तो इसे हाइपोथाइरॉएडिज्म कहते हैं। इसके कारण मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है,  व्यक्ति को थकावट होती है और उसका वजन बढ़ने लगता है।

क्या करें:  ऊर्जा की कमी, वजन बढ़ने के साथ गर्मी और ठंड सहन न होना और त्वचा रूखी होना थाइरॉएड ग्रंथि के असक्रिय होने के लक्षण हो सकते हैं। इसके लिए चिकित्सक से संपर्क करें। 

अवसाद ( डिप्रेशन)
डिप्रेशन को भावों की गड़बड़ी से जोड़ कर देखा जाता है,  पर इसके कई अन्य लक्षण भी होते हैं,  जैसे थकावट,  सिरदर्द और भूख न लगना। यदि थकावट महसूस कर रहे हैं और उसका कोई अन्य कारण नजर नहीं आ रहा तो मनोचिकित्सक से मिलने में संकोच न करें।

क्या करें:  किसी अच्छे मित्र से दिल की बात कहें। नियमित व्यायाम करें,  इससे खुशी देने वाले हार्मोन का स्राव होगा। अच्छा संगीत सुनें।

कैफीन की अधिकता
थोड़ी मात्रा में कैफीन का सेवन सक्रियता व एकाग्रता को बढ़ाता है,  पर इसकी अधिक मात्रा हृदय गति और रक्तचाप को बढ़ाती है,  जिससे थकावट होती है।

क्या करें:  कॉफी,  चॉकलेट और एनर्जी ड्रिंक्स के रूप में ली जा रही कैफीन का सेवन कम से कम करें। हालांकि ऐसा धीरे-धीरे करें। कैफीन को अचानक कम कर देना शरीर में ऊर्जा की कमी कर थकावट को बढ़ा सकता है।

युरिनरी इन्फेक्शन
युरिनरी ट्रेक्ट इन्फेक्शन यानी मूत्र मार्ग में संक्रमण होने पर पेशाब करने में जलन होती है और जल्दी-जल्दी पेशाब करने की इच्छा होती है। पर कुछ मामलों में थकावट और हल्के चक्कर आना भी इसके लक्षण होते हैं। ऐसे में युरीन टेस्ट के जरिए यूटीआई की तुरंत पुष्टि की जा सकती है।

क्या करें:  यूटीआई के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। दवाएं शुरू करने के बाद आमतौर पर एक हफ्ते में यूटीआई की समस्या ठीक हो जाती है।

डीहाइड्रेशन
भरपूर पानी पिएं,  खासतौर पर यदि आप बाहर काम करते या बहुत अधिक शारीरिक श्रम करते हैं। शरीर में पानी की कमी होने से इलेक्ट्रोलाइट्स कम होने लगते हैं,  जिससे थकावट होती है। प्यास लगने से पहले पानी पीने की आदत डालें। प्यास लगने का मतलब है कि शरीर में पहले ही पानी की कमी हो चुकी है। 

क्या करें:  हर एक घंटे बाद पानी पिएं। इसके अलावा वर्कआउट या व्यायाम के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर बाद घूंट-घूंट करके पानी पिएं। युरीन का रंग गहरा पीला हो जाना भी शरीर में पानी की कमी को दर्शाता है।

हृदय रोग
यदि बार-बार सांस फूलती है और सामान्य दिनचर्या को पूरा करने में भी बहुत थकावट महसूस होती है तो हृदय जांच कराना सही रहता है।
क्या करें:  चिकित्सक से मिलें। सांस प्रक्रिया में सुधार करने वाले व्यायाम भी फायदेमंद रहते हैं।

शिफ्ट्स में काम करना
यदि कॉल सेंटर में नौकरी करते हैं या काम के घंटे अनियमित हैं तो नींद के पैटर्न में होने वाली बाधा भी थकावट का कारण हो सकती है।
क्या करें:  सोने के समय कमरे की बत्ती बंद कर दें। कई बार डॉक्टर मेलाटॉनिक सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं।

सीएफएस
यदि कई माह से थकावट है और नियमित कार्यों को पूरा करने में भी परेशानी होती है तो यह क्रॉनिक फटीग का लक्षण हो सकता है।
क्या करें:  जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव,  नियमित व्यायाम और तनाव मुक्त रखने वाली क्रियाएं राहत देती हैं। 
बहुत थोड़ा खाने से तो थकावट होती ही है,  साथ ही गलत खान-पान भी समस्या का कारण बन सकता है। संतुलित आहार के साथ सब्जियां व अनाज जैसे कॉम्लेक्स काबरेहाइड्रेट का सेवन रक्त शर्करा को सामान्य बनाता है। यह संतुष्टि खाली जूस पीकर नहीं मिलती। जूस के सेवन से शुरुआत में तो शर्करा का स्तर तेजी से ऊपर जाता है,  पर तुरंत ही नीचे गिरना लगता है।

क्या करें
सुबह का नाश्ता अवश्य करें। हर समय के भोजन में प्रोटीन और कॉम्लेक्स काबरेहाइड्रेट को शामिल करें,  जैसे साबुत अनाज की ब्रेड से बना वेजिटेबल सेंडविच या अण्डा टोस्ट खाएं। दूध व मेवे के साथ ओट्स खाएं। थोड़े-थोड़े समय बाद कुछ न कुछ हल्का खाते रहें। इसके शर्करा का स्तर बना रहेगा।
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