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यादव सिंह के खिलाफ ईडी की जांच रुकी

काली कमाई के धुरंधर को बच निकलने के रास्ते कैसे मिलते हैं ये इसका ताजा-तरीन नमूना है। जी हां, अरबपति इंजीनियर यादव सिंह के खिलाफ ईडी की जांच शुरू होने से पहले ही अधर में लटक गई है। ईडी के पास फिलहाल कोई ऐसा आधार नहीं है, जिस पर वह यादव सिंह की काली कमाई को जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर सके।

ईडी को इंतजार तो एक अदद एफआईआर का ताकि यादव सिंह को नए सिरे से कानूनी शिकंजे में फांसा जा सके। बिना नई एफआईआर के ईडी कुछ नहीं कर सकेगी। ईडी ने दरअसल केंद्रीय एजेंसियों के इशारे पर प्रारंभिक जांच शुरू की। नोएडा में 954 करोड़ के घोटाले में दर्ज एफआईआर को हासिल किया। इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि सीबीसीआईडी इस घोटाले में तो फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी है। एसपी सीबीसीआईडी लखनऊ के मुताबिक, अदालत ने इस फाइनल रिपोर्ट को मंजूर भी कर लिया है। बस यहीं ईडी के हाथ-पैर बंध गए। ऐसे में नई एफआईआर ही विकल्प है।

ईडी के अधिकारियों का कहना है कि सुबूत तो बहुत हैं। फर्जी कंपनियां बनी हैं। काली कमाई को बखूबी सफेद में तब्दील किया गया है। ये मनी लांडरिंग का फिट केस है। फिर भी उसे शुरूआत करने को आधार चाहिए, जो फिलहाल न तो आयकर की जांच से मिल रहा है और न राज्य के रवैये से। एक सीबीसीआईडी की जांच थी वह भी बंद हो चुकी है। ऐसे में ईडी अधिकारी चाहते हैं कि यादव सिंह के खिलाफ एक अदद नई एफआईआर तो हो। ऐसा होते ही ईडी तुरंत हरकत में आएगी और संपत्तियों के जब्त करने के साथ ही छापेमारी शुरू हो सकेगी।
इनसेट :-
ईडी इन हालातों में ही शुरू कर सकती है जांच
-राज्य अथवा केंद्र की कोई एजेंसी एफआईआर करे। जो नहीं हुई।
-भ्रष्टाचार के किसी मामले में राज्य अथवा केंद्र की एजेंसी ने अदालत में आरोपपत्र लगाया हो।
-यादव सिंह के मामले में कोई ताजी एफआईआर नहीं हुई है।
-राज्य सरकार का कर्मचारी होने के कारण सीबीआई सीधे जांच कर नहीं सकती।
-राज्य सरकार अगर आय से ज्यादा संपत्ति का केस दर्ज करे तो बात बनेगी।
-आयकर अगर धोखाधड़ी और मनी लांडरिंग का दर्ज कराए केस।

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