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प्रदेश भर में क्लियरेनस में फंसे चेक का आंकड़ा 65 हजार करोड़ रहा

महीने भर में दूसरी बार हुई हड़ताल के कारण बुधवार को बैकों में कोई कामकाज नहीं हो सका। हालत यह रही कि कमोबेश सभी बैंकों की शाखाओं के ताले तक नहीं खुले। इससे लखनऊ में करीब डेढ़ हजार करोड़ के चेकों का क्लियरेंस नहीं हो सका तो प्रदेश भर में करीब 65 हजार करोड़ के चेकों का क्लियरिंग बाधित रहा।

राजधानी में हड़ताली कर्मचारियों ने हजरतगंज स्थित इलाहाबाद बैंक की मुख्य शाखा के सामने प्रदर्शन किया और वेतन पुनरीक्षण के मामले में तत्काल सकारात्मक निर्णय की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर केन्द्र सरकार तथा भारतीय बैंक संघ (आईबीए) का बैंककर्मियों के प्रति हठी रवैया जारी रहा तो आने वाले समय में और आन्दोलन होंगे। इस बीच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू)  के मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने दावा किया कि राष्ट्रीयकृत बैंकों से लेकर कई सहकारी बैंकों के भी ताले तक नहीं खुल सके। उन्होंने कहा की हड़ताल का असर निजी  क्षेत्र के बैंकों पर भी पड़ा और तमाम निजी बैंकों में भी कोई कामकाज नहीं हुआ।

बैंक कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
यूएफबीयू के आह्वन पर हुई इस देशव्यापी हड़ताल के दौरान राजधानी लखनऊ में विभिन्न बैंकों की करीब आठ सौ शाखाओं में सुबह से शाम तक ताले लटकते रहे। इस दौरान हड़ताली बैंककर्मी अलग-अलग समूहों में नारेबाजी करते हुए हजरतगंज स्थित इलाहाबाद बैंक के मुख्य शाखा पहुंचे जहां उन्होंने प्रदर्शन किया और सभा कर केन्द्र सरकार एवं आईबीए को खरी-खोटी सुनाई। सभी ने आरोप लगाया कि निजी बैंक प्रबन्धन के दबावों के कारण आईबीए व केन्द्र सरकार राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों के मसले को नहीं सुलझा रही ताकि सरकार बैंक़ों में प्रबन्धन और कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहे और इसका लाभ निजी क्षेत्र को मिलता रहे।

 कई वक्तताओं ने सम्बन्धित मुद्दे पर बेमियादी हड़ताल करने तक की धमकी दी और कहा कि अपने हक के लिए अब हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा है। सभा को वीके श्रीवास्तव, वीके सेंगर, ताहिर अली, आरके चारी, ववाई के अरोरा, दिलीप चौहान,दीपेन्द्र लाल, उमाशंकर श्रीवास्तव आदि ने सम्बोधित किया।

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