DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आए हैं बाराती, छिप जाओ सारे घर में

रात में दफ्तर से लौटते हुए जब देखता हूं कि निद्र्वंद्व घूमने वाले छुट्टे सांड पेड़ों के पीछे छिपकर खड़े हैं और आवारा कुत्ते दुकानों के तख्तों के नीचे दुबके हैं, तो मैं समझ जाता हूं कि शादियों का मौसम आ गया है। इस मौसम में बाराती नामक जीव सड़कों पर आ जाते हैं, जो इन जीवों को भी डरा देते हैं। बाराती एक ऐसा जीव है, जिस पर देश का कोई भी कानून व सभ्यता का कोई भी नियम लागू नहीं होता। जो शराब पीकर सड़क पर खुलेआम नाच सकता है, वह कुछ भी कर सकता है। बाराती होने का असल आनंद दूसरों को तकलीफ देने में ही होता है। जब नाच की वजह से सड़क पर भारी जाम लग जाता है, तब उसे बाराती होने का असली सुख प्राप्त होता है।

गब्बर सिंह के डर से रामगढ़ और आसपास के इलाकों की मां बच्चों को सुलाया करती थीं। कहते हैं कि जब गब्बर सिंह बच्चा था, तो उसकी मां कहती थीं- ‘सो जा बेटा, वरना बाराती आ जाएंगे।’ गब्बर सिंह की मौत के बाद उन माओं को दिक्कत हो गई कि बच्चों को सुलाएं कैसे? उन्होंने भी गब्बर की मां वाली ट्रिक इस्तेमाल की और बच्चों को बारातियों के डर से सुलाने लगीं।

यह हमेशा ही ज्यादा अच्छा तरीका है, क्योंकि गब्बर तो आने-जाने हैं, जब तक भारत में शादियां हैं, बाराती तो रहेंगे ही। रात में पेट्रोमैक्स की रोशनी में गलत साइज के सूट में अपनी तोंद फंसाए पुरुष बारातियों या त्रिजटा की तरह मेकअप किए महिला के भयानक नृत्य को याद कर कौन नहीं सिहर जाएगा? अच्छे भले शरीफ लोग जैसे ही बारात में जाने वाले कपड़े पहनकर परफ्यूम का छिड़काव करते हैं, तो उनमें नादिरशाह और तैमूरलंग के सैनिकों वाली वृत्ति भर जाती है। वे रास्तों को उजाड़ते हुए चलते हैं, बैंक्वेट हॉल में तबाही मचा देते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि नादिरशाह और तैमूर की फौज के मामले में उजाड़े गए लोग त्राहि-त्राहि करते थे, यहां लड़की वाले गदगद भाव से अपनी तबाही देखकर खुश होते रहते हैं। आखिर इसी दिन के लिए तो जीवन भर बचत की थी। विध्वंस का ऐसा उत्सव मनाने वाली जांबाज कौम दुनिया में और कहां होगी?
राजेन्द्र धोड़पकर

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:आए हैं बाराती, छिप जाओ सारे घर में