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सूरजकुंड मेले में छत्तीसगढ़ के व्यंजनों का चख सकेंगे स्वाद

29वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का फूडकोर्ट बड़ा होगा। इसमें मेले के थीम स्टेट छत्तीसगढ़ के व्यंजनों के बीस स्टाल का फूडकोर्ट अगल होगा। जिसमें पर्यटक आदिवासी इलाके के जड़ी-बूटी वाले व्यंजनों का स्वाद भी चख सकेंगे। हरियाणा पर्यटन निगम व छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में यह सहमति बनी है। साथ ही तय किया गया है कि शिल्पकारों के बीच कोई फूडकोर्ट नहीं होगा।

    एक फरवरी से पंद्रह फरवरी के बीच चलने वाले अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले की तैयारियां इन दिनों जोरों पर है। मेले का विस्तार व मामूली बदलाव करने को लेकर हरियाणा पर्यटन निगम व मेला प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श जोरों पर हैं। मेले के फूडकोर्ट को लेकर हुई बैठक में तय किया गया है कि इस बार फूडकोर्ट का विस्तार होगा। जिसमें थीम स्टेट के करीब बीस स्टॉल समेत, राजस्थान, दक्षिण भारतीय व्यंजन, दिल्ली की चाट-पकौड़ी, हरियाणवी तड़का और कुछ विदेशी व्यंजनों के स्टाल लगाए जाएंगे। इसके लिए जल्द ही टेंडर होंगे। सुरक्षा के मदद्देनजर सुझाव आया है कि कोई भी फूडकोर्ट शिल्पकारों के स्टॉल के बीच नहीं होगा।

छत्तीसगढ़ के व्यंजनों पर एक नजर
छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, इसलिए लगभग सभी व्यंजनों में चावल व तिहलन का उपयोग होता है। वहां के आदिवासी इलाकों के व्यंजनों की अलग-अलग परम्पराएं हैं। वन क्षेत्र में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों का उपयोग वहां सब्जी की तरह होता है। कई व्यंजनों में इनकी अधिकता होती है।  

-ठेठरी व खुरमी व गुलगुला का नाश्ता: यह छत्तीसगढ़ के त्यौहारों और खुशी के मौके पर तैयार किए जाने वाले यह नाश्ते गेहूं या चावल के आटा, कच्ची हल्दी और जड़ी-बूटी के तेल में बनाया जाता है। इसके साथ मीठे में गुलगुला भी मिलेगा। सब्जियों वाली खिचड़ी: इसमें छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली जंगली सब्जियों के साथ चावल में डालकर इसे पकाया जाता है। जो बहुत स्वादिष्ट व्यंजन माना जाता है। साथ ही धुंसका व चीला जैसे व्यंजन ज्वार, चावल, गेहूं के आटे से बनाई जाते हैं। यह वहां का प्रमुख व्यंजन होता है।

मेले में नॉनवेज भी होगा
सूरजकुंड मेले अंतर्राष्ट्रीय स्तर का होने के बाद मेले में नॉनवेज खाना भी उपलब्ध होगा। मेले में करीब डेढ़ दजर्न से अधिक देशों के शिल्पकार और लोककलाकार शिरकत करते हैं। ऐसे में उनके मद्देनजर यहां कुछ नॉनवेज स्टॉल भी होंगी। जिनमें ङींगा करी और मछली से बनी कई डिश होंगी। चिकन कैफरिएल और ड्राई चिकन भी होगा।

हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए लगता है मेला
देश-विदेश में भारतीय लोककला और हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देने के लिए अरावली पर्वत श्रंखलाओं के बीच दिल्ली सीमा से सटे सूरजकुंड इलाके में बीते 28 साल से सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला प्रतिवर्ष एक फरवरी से पंद्रह फरवरी तक लगाया जाता है। जिसमें देश-विदेश के हस्तशिल्पी अपने हुनर का प्रदर्शन करते हैं। केंद्रीय वस्त्र मंत्रलय, केंद्रीय पर्यटन मंत्रलय और हरियाणा पर्यटन निगम मिलकर इसका आयोजन करता है। हर साल एक राज्य को थीम के रूप में चुनते हैं। ताकि उस राज्य के पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके। थीम स्टेट अपनी लोककला-संस्कृति से यहां आने वाले दर्शकों को रूबरू करवाने के लिए मेला परिसर की सजावट अपने ढंग से करता है। मेले में अपनी कला में राष्ट्रीय अवार्ड हासिल कर चुके शिल्पकारों को देश भर से इसमें आमंत्रित किया जाता है। जो अपने सामान की बिक्री सीधे ग्राहकों को कर सकते हैं। यानी इस मंच पर शिल्पकारों को सीधी मार्केटिंग का मौका मिलता है।
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राजेश जून, मेला अधिकारी, हरियाणा पर्यटन निगम: मेले में इस बार फूड कोर्ट के विस्तार पर विचार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के फूडकोर्ट में करीब बीस स्टॉल होंगे। अन्य प्रदेशों के फूड कोर्ट भी तय किए जा रहे हैं। कुछ विदेशी खाने के स्टॉल भी होंगे।
सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले पर एक नजर
मेला क्षेत्रफल:              70 एकड़
शिल्पकार                  करीब 575
लोककलाकार         करीब 400
थीम स्टेट                छत्तीसगढ़
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए चौपाल: दो
फूड़कोर्ट: करीब पांच
 

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