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मारीशस के लिए डॉक्टरों का इंतजाम करने में जुटा केंद्र

मारीशस के लिए डॉक्टरों का इंतजाम करने में जुटा केंद्र

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एक तरफ तो डॉक्टरों के विदेशों को पलायन पर चिंता प्रकट करता है। इसी सिलसिले में उसने अध्ययन के लिए विदेश जाने वाले डॉक्टरों के लिए नियमों को सख्त बना दिया है तथा उनसे पांच लाख के बांड भी भरवाए जा रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ मारीशस के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय डॉक्टरों की भर्तियों को प्रोत्साहित कर रहा है।

मॉरीशस सरकार के पास विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। इस सिलसिले में मारीशस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय से संपर्क किया। मारीशस के उच्चायुक्त ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, विदेश और मानव संसाधन विकास मंत्रालयों को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वे भारत से विशेषज्ञ डाक्टर उपलब्ध कराने में मदद करें। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी सूचना को सरकारी अस्पतालों एवं सूचना केंद्रों, वेबसाइटों पर प्रचारित किया है ताकि मारीशस के लिए ज्यादा से ज्यादा डॉक्टर आवेदन कर सकें।

मारीशस को पांच किस्म के विशेषज्ञ डॉक्टर चाहिए। जिनमें प्लास्टिक सर्जरी, स्त्री रोग विशेषज्ञ, नवजात शिशु विशेषज्ञ, प्रत्यारोपण सर्जरी विशेषज्ञ, दिल की सर्जरी के विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत बताई है। हालांकि मारीशस ने संख्या का खुलासा नहीं किया है लेकिन खबर है कि उसे डॉक्टरों की बड़े पैमाने पर जरूरत है। वह ज्यादा से ज्यादा डॉक्टर भर्ती करने का इच्छुक है, बशर्ते की उसे पर्याप्त आवेदन मिलें और वे मारीशस की मेडिकल काउंसिल द्वारा तय मानकों को पूरा करते हों।

सरकारी चैनल से मारीशस के लिए डाक्टरों की भर्ती पर स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों को भी आश्चर्य है। इस आशंका है कि इस कदम से बड़े पैमाने पर सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर हिन्दुस्तान छोड़कर मॉरीशस जा सकते हैं। एक अधिकारी के अनुसार मंत्रालय के पास विकल्प था कि वह सरकारी चैनल का इस्तेमाल नहीं करे। मॉरीशस निजी एजेंसी की मदद से डॉक्टरों की भर्ती करने को स्वतंत्र है।

बता दें कि पिछली सरकार ने अध्ययन के लिए अमेरिका जाने वाले डॉक्टरों के लिए आवश्यक कई किस्म के अनापत्ति प्रमाण पत्र बंद कर दिए थे। साथ ही बौंड की राशि भी बढ़कर पांच लाख कर दी थी। पिछले दिनों जब स्वास्थ्य मंत्री अमेरिका गए थे तो उन्होंने भारतीय मूल के डॉक्टरों से वतन वापसी की भी अपील की थी।

देश में डॉक्टरों की कमी
-स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार करीब दो लाख से भी ज्यादा भारतीय डॉक्टर इस समय विदेशों में कार्य कर रहे हैं। साथ ही तकरीबन ढाई हजार डॉक्टर प्रतिमाह अल्प व दीर्घ अवधि कोर्स के लिए विदेश जाते हैं जिनमें से काफी वापस नहीं लौटते हैं।
-देश में करीब छह लाख डॉक्टरों की कमी होने का अनुमान है। प्रतिवर्ष 50 हजार डॉक्टर ही देश में तैयार हो पा रहे हैं जबकि कम से कम लाख डाक्टर तैयार किए जाने की जरूरत है।

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