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स्वर्ण व्यवसायी के चार अपहर्ता पुलिस के हत्थे चढ़े

कस्बा मकेर के स्वर्ण व्यवसायी दीपक कुमार सोनी अपहरण कांड का भंडाफोड़ पुलिस ने कर लिया है। अपहरण में शामिल चार अपहर्ता पुलिस के हत्थे चढ़ गये हैं। गिरफ्तार अपहर्ताओं में मुजफ्फरपुर जिले के सरैया थाना क्षेत्र के अमवारा गांव निवासी रामेश्वर ठाकुर का पुत्र पप्पू ठाकुर, मड़वापाकड़ गांव के रमण पाठक का पुत्र अवधेश पाठक उर्फ अवध पाठक, रामपुरवा के राकेश सिंह का पुत्र विकास कुमार और वैशाली जिले के वैशाली थाना क्षेत्र के फुसर गांव के नंदकिशोर सिंह का पुत्र सूर्यनाथ सिंह उर्फ राणा शामिल है। हालांकि इस अपहरण कांड में सात से आठ अपराधियों की संलिप्तता बतायी जा रही है और अन्य की गिरफ्तारी अभी बाकी है। पुलिस गिरफ्त से बाहर रहने वाले अपराधियों में कुछ स्थानीय भी शामिल हैं।
 
व्यवसायी की बरामदगी के बाद भी उसकी बाइक की खोज पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी पर अंतत: पुलिस ने बाइक भी बरामद कर ली है। उसकी टीवीएस स्टार सिटी बाइक गिरफ्तार अपराधी राणा के घर से पुलिस ने बरामद की है। यह वही बाइक है, जिससे दीपक परसा स्थित बलहा बाजार से अपनी दुकान बंद कर 18 नवंबर को घर लौट रहा था और रास्ते में उसका अपहरण वर्दीधारी अपरधियों ने कर लिया गया था। उसे अगवा कर जिस सूमो गोल्ड गाड़ी से उसे ले जाया गया था उसे पुलिस पहले ही बरामद कर चुकी है। वह चारपहिया वाहन मुजफ्फरपुर जिले के सरैया थाना क्षेत्र के रामदौली गांव निवासी पवन पाठक का है। वही इस अपहरण कांड का मास्टरमाइंड है।

अपहर्ताओं की जुबानी, अपहरण की कहानी
गिरफ्तार अपहर्ताओं ने पुलिस के समक्ष दीपक के अपहरण की कहानी बयां की है। इस कहानी के अनुसार उसे बलहा बजार से कुछ ही दूरी पर उठाया गया था। पवन की गाड़ी से दीपक को लेकर वे लोग उसी के घर मड़वा पाकड़ गये थे। वहां चार घंटे उसे रखने के बाद उसी रात राणा के घर वैशाली के फुलार गांव में पहुंचा दिया गया था। लेकिन दूसरे दिन ही उसे वहां से हटा दिया गया और फिर मुजफ्फरपुर के मड़वा पाकड़ गांव ले जाया गया। वहां पांचू सहनी के घर में उसे तीन दिन रखा गया। वहां से दीपक को फिर पवन पाठक के घर लाया गया। वहीं से 25 नवंबर को वह पवन की दूसरी पत्नी श्वेता पाठक के सहयोग से भाग निकला।

तीन बार फोन कर मांगी गई एक करोड़ की फिरौती
दीपक को छोड़ने के लिए अपहर्ताओं ने एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। पहली बार फिरैती की रकम की मांग 20 नवंबर को की गई। उस दिन दीपक के मोबाइल से ही उसके भाई को फोन कर फिरौती की रकम की मांग की गई थी। उसके बाद 22 और 23 नवंबर को अलग-अलग मोबाइल से फोन किया गया और फिरौती की रकम देने की मांग करते हुए धमकी दी गई। अपहर्ताओं ने जिन मोबाइलों का उपयोग फिरौती की रकम मांगने के लिए किया, उसी को पुलिस ने भंडाफोड़ का हथियार बनाया। सिम के कॉल डिटेल्स निकाले गये और अपराधियों के ठिकानों का पता लगा 25 नवंबर को पुलिस उस ठिकाने पर सरैया थाने के मड़वा पाकड़ गांव पहुंची। लेकिन इसके पहले ही अपहृत दीपक वहां से भाग चला था।
 
सात थानों की पुलिस लगी थी भंडाफोड़ में
युवा स्वर्ण व्यवसायी अपहरण कांड के भंडाफोड़ में जिले के सात थानों के थानाध्यक्ष व पुलिसकर्मी लगे हुए थे। एसपी सत्यवीर सिंह ने इस चर्चित मामले को निपटाने में जो पुलिस टीम गठित की थी, उसमें डेरनी, दरियापुर, डोरीगंज, परसा, मकेर, सोनपुर और पानापुर के थानाध्यक्ष व पुलिस जवानों सहित एसटीएफ के जवान शामिल थे। इस टीम का नेतृत्व सोनपुर एसडीपीओ कर रहे थे।

पुलिस टीम होगी पुरस्कृत
अपहरण कांड का खुलासा करते हुए एसपी ने बुधवार को बताया कि अपराधियों की गिरफ्तारी और कांड के उद्भेदन के लिए जो पुलिस टीम गठित की गई थी, उसके अफसरों ने बेहतर काम किया है। इन पुलिस अफसरों को पुरस्कृत किया जायेगा। उन्होंने बताया कि स्वर्ण व्यवसायी दीपक के अपहरण के मामले की गुत्थी सुलझा ली गई है। इस अवसर पर सोनपुर डीएसपी अशोक कुमार चौधरी भी उपस्थित थे।

व्यवसायी परिवार से मिले मंत्री
बुधवार को स्वर्ण व्यवसायी दीपक कुमार सोनी और उनके परिजनों से पीएचईडी मंत्री डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह मिले। उन्होंने अपहर्ताओं के चंगुल से निकलने के लिए दीपक के हौसले की दाद दी। वहीं उन्होंने इस अपहरण कांड का भंडाफोडम् करने के लिए सारण पुलिस की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि सरकार सूबे में अमन-चैन बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। अपराधी सिर भले उठा लें, लेकिन वे बख्शे नहीं जायेंगे। यह इस घटनाक्रम में भी साबित हो गया है।

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