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साइबर अपराध पर भारत-जापान हो सकते हैं एकजुट: रविशंकर प्रसाद

साइबर अपराध पर भारत-जापान हो सकते हैं एकजुट: रविशंकर प्रसाद

भारत व जापान एक दूसरे की प्रौद्योगिकी ताकत का लाभ उठाकर हरित प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा व आईसीटी विकास जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं। संचार एवं आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को यह बात कही।
      
आईसीटी पर भारत-जापान संयुक्त कार्यसमूह की दूसरी बैठक को संबोधित करते हुए प्रसाद ने कहा कि भारत सरकार ने प्रशासनिक कामकाज के डिजिटलीकरण के लिए एक बड़ा कार्यक्रम शुरू किया है। इसका एकमात्र उददेश्य दक्षता व सेवाओं की आपूर्ति में सुधार है।
     
देश में राजकाज के संचालन में बदलाव में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका के संदर्भ में भारत ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। जापान जैसे दोस्तों की मदद से हम यह उददेश्य हासिल कर सकते हैं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए इस समूह का अक्टूबर, 2013 में गठन किया गया था। यह समूह की दूसरी बैठक है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई प्रसाद कर रहे हैं, जबकि जापान के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई नीति संयोजन (अंतरराष्ट्रीय मामले) पर उपमंत्री यासुओ साकामोतो कर रहे हैं। समूह ने हरित प्रौद्योगिकी व साइबर सुरक्षा की परियोजनाओं पर विचार विमर्श किया। साथ ही सामाजिक व आर्थिक क्षेत्रों में आईसीटी एप्लिकेशन के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। प्रसाद ने कहा कि इस कार्यक्रम में जापान जैसे दक्ष सहयोगी की मदद से काफी लाभ मिलेगा।
     
जापान आईसीटी के क्षेत्र में काफी आगे है। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार में कई गुना का इजाफा करने में मदद मिलेगी, जो अभी मात्र एक प्रतिशत है। समूह राष्ट्रीय आईडी एप्लिकेशन व यूटिलाइजेशन परियोजना में भी सहयोग की संभावना तलाश रहा है।
      
साकामोतो ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग एक नए मोड़ पर है और इसमें काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के उद्यमी साइबर सुरक्षा व हरित आईसीटी के क्षेत्र में आपसी सहयोग के अवसर तलाश सकते हैं।

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