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देना होगा गुजराभत्ता पत्नी और बच्चे को

दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को उससे अलग हो चुकी पत्नी और दो साल के बच्चे को 8,000 रूपए मासिक का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि दोनों को बेहतर और आरामदायक जीवन जीने का अधिकार है।
     
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय शर्मा ने दिल्ली निवासी व्यक्ति की निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील को ठुकराते हुए उसे महिला और बच्चे दोनों को प्रतिमाह 4,000-4,000 रूपए का अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है।
     
निचली अदालत द्वारा गुजारा भत्ता को अत्यधिक और खारिज करने योग्य बताते हुए व्यक्ति ने इसके खिलाफ सत्र अदालत में अपील दायर की थी। अदालत ने कहा कि प्रतिवादी संख्या एक (महिला) और दो (बच्चा) बेहतर और आरामदायक जीवन बिताने के हकदार हैं। अपीलकर्ता (व्यक्ति) के पास उन्हें गुजार भत्ता देने के अलावा कोई और जिम्मेदारी नहीं है।
     
अपने आदेश में अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि व्यक्ति ने अदालत के समक्ष अपनी वास्तविक आय छुपाई और इस संबंध में संबंधित दस्तावेज मुहैया नहीं कराया। इसमें इस बात का उल्लेख किया गया कि महिला की आमदनी नहीं है। अदालत ने कहा कि, महिला और दो साल के बच्चे की आज की आम जरूरतों को देखते हुए दोनों के लिए प्रतिमाह 4,000-4,000 रूपए का अंतरिम गुजारा भत्ता बहुत अधिक नहीं है।
     
महिला ने अदालत को बताया कि अक्टूबर 2011 में महिला की व्यक्ति से शादी हुई थी लेकिन जल्द ही दोनों का वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण हो गया और जुलाई 2012 से वह अपने माता पिता के साथ रह रही है। इसके बाद ही महिला ने स्वयं और अपने बच्चों के लिए अंतरिम गुजरा भत्ता की मांग करते हुए अदालत के समक्ष याचिका दायर की थी।

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