DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कंबो शहर की यात्रा

कंबो शहर की यात्रा

एक दिन कौमी कौआ काफी दिनों बाद अपने गांव आया। गांव में सभी पक्षियों ने उसका खूब स्वागत किया। कौमी में एक आदत थी कि जब भी वह गांव जाता तो अपने सभी दोस्तों के लिए कुछ न कुछ खाने की चीज साथ लेकर जरूर जाता। इस बार वह पिज्जा लेकर गया, जिसका स्वाद चखकर सभी पक्षियों को आनंद आ गया। पिज्जा खाकर कोबू कबूतर बोला- ‘भई कौमी, यह तो तू कमाल की चीज लेकर आया है। इसमें जो स्वाद है, ऐसा स्वाद हमने कहीं नहीं चखा। इससे पहले तू पास्ता लेकर आया था। वह भी गजब की चीज थी! वैसे बड़ा मजा आता है शहर में रहने का। वहां अच्छी-अच्छी चीजें मिलती हैं खाने की। अब तो तेरे साथ मैं भी कंबो शहर चलूंगा।’ कोबू कबूतर की बात सुनकर कौमी ने हां कहते हुए अपना सिर हिलाया।

कौमी जब भी कंबो शहर से गांव आता तो मैकू मोर उससे कहता कि इस बार तो अपने साथ ले चल। पर कौमी हर बार मैकू को कोई बहाना बनाकर टाल देता था। कौमी मन में सोचता-इतना भारी-भरकम शरीर है। कंबो शहर में इसका गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा। एक तो वहां भीड़भाड़ बहुत है और पेड़ों की कमी है। जो भी पेड़ बचे हैं वो भी एक-एक कर कटते जा रहे हैं। मेरा ही वहां रहना मुश्किल हो रहा है। मैं जिस पेड़ पर रहता हूं, वह भी किसी दिन कट जाएगा, क्योंकि वहां पर कोई बड़ी बिल्डिंग बनाई जाएगी। मेरा क्या, मैं तो किसी की छत पर फुर्र से उड़कर चला जाऊंगा। किसी रास्ते से भी भोजन उठा लूंगा। पर मैकू मोर ये सब नहीं कर पाएगा। लेकिन कैसे समझाऊं मैकू को।

तभी फुदकती हुई गौरी गौरैया आ धमकी। बोली- ‘पिज्जा बहुत अच्छा था। अगली बार भी लेकर आना।’

‘जरूर लाऊंगा। इससे भी अच्छी चीज लेकर आऊंगा।’ कौमी ने कहा।

गौरी गौरैया भी बहुत दिनों से सोच रही थी कि कौमी के साथ कंबो शहर घूमकर आए। हर बार कोई न कोई काम उसे लगा ही रहता था। इस बार वह कौमी के साथ पक्का जाएगी, यह सोचकर कौमी से बाली- ‘कौमी भइया, आप तो खूब घूमते रहते हैं और हम यहां से कहीं घूमने ही नहीं जा पाते। इस बार हमें भी कंबो घुमाने अपने साथ ले चलो न।’ कौमी बोला- ‘जरूर ले चलूंगा। तुम्हें तो देखकर वहां लोग बहुत खुश होंगे।’
उधर तारू तोता भी कौमी के साथ चलने के लिए तैयार हो गया। पिछली बार जब कौमी आया था तो उसने वादा किया था कि अगली बार वह तारू को जरूर लेकर जाएगा। कौमी ने कोबू कबूतर, गौरी गौरैया और तारू तोता को अपने साथ ले चलने के लिए तो कह दिया, लेकिन सोच में पड़ गया कि वहां जाकर ये लोग परेशान न हो जाएं। अगले दिन चारों दोस्त तैयार होकर कंबो शहर चल दिये। दिन भर उड़ान भरी और शाम को शहर पहुंच गए। गौरी शरीर में बहुत छोटी थी, इसलिए ज्यादा थक गई। उसे जल्दी से नींद आ गई। अगले दिन सुबह कौमी के साथ वे तीनों दोस्त घूमने के लिए निकले। पूरे शहर का चक्कर लगाया। ऊंची-ऊंची बिल्डिंग, हर जगह भीड़-भाड़ और शोर-शराबा। इस तरह का माहौल उन्होंने कहीं नहीं देखा था। कौमी जहां रहता था, वहीं थोड़ी-बहुत हरियाली थी। उसके पास में रिहायशी इलाका था और उससे आगे काफी दूर तक बहुत सारी फैक्टरी थीं। दूसरे दिन कौमी को अपने काम पर जाना था। उसने दोस्तों से कहा कि आज तुम लोग खुद घूमो। तीनों दोस्त पास के रिहायशी इलाके में घूमने चल दिए। गौरी गौरैया एक मकान की छत पर चली गई। उस छत पर कई छोटे-छोटे बच्चे खेल रहे थे। उन्होंने छोटी गौरैया को देखा तो बहुत खुश हुए। मौनू ने पहली बार इतनी छोटी गौरैया को देखा था। उसने तुरंत अपनी मम्मी को आवाज लगाई- ‘मॉम, देखो हमारी छत पर कितनी छोटी चिडिया आई है।’ मॉम तुरंत दौड़कर आईं और बोलीं- यह चिडिया तो यहां दिखाई ही नहीं देती है, कई सालों पहले देखी थी। इसके लिए एक बर्तन में पानी लाओ और कुछ खाने को दो। कितनी सुन्दर चिडिया है ये! मौनू तुरंत एक बर्तन में पानी भरकर ले आया। साथ में कुछ ब्रेड, बिस्किट के टुकड़े लाया और उसके सामने रख दिये और मम्मी के साथ दूर जाकर खड़ा हो गया। गौरी ने फुदक-फुदक कर बिस्किट और ब्रेड खाए और पानी पीकर उड़ गई।

उधर कोबू कबूतर घूमने निकला तो उसे एक स्थान पर बहुत सारे कबूतर दिखाई दिए, जो वहां पड़े अनाज को खा रहे थे। कोबू भी उनमें जा मिला और खूब छक कर अनाज खाया। तारू तोता भी वहां इधर-उधर घूमा। घरों की छतों पर खूब चक्कर लगाए। वहां कुछ खाने का भी सामान मिला, लेकिन फल खाने को नहीं मिले, क्योंकि वहां फलों के पेड़ ही नहीं थे। उसे प्यास लगी, तो पास में ही नाली में गंदा पानी बह रहा था। प्यास सहन न होने की वजह से उसे वही पानी पीना पड़ा। पानी पीकर उसे चक्कर आने लगे। वह पास की ही छत पर उड़ते हुए गिर पड़ा। छत पर एक बच्चा खेल रहा था। उसने अपनी मॉम को बुलाया तो उन्होंने उसे पकड़कर थोड़ी देर छाया में रखा, उसके बाद उसे पानी पिलाया।
थोड़ी देर में होश आने के बाद वह उड़ गया और कौमी के घर आ गया। कौमी को जब यह बात पता लगी तो बहुत दुखी हुआ। उसने तीनों दोस्तों से कहा कि कोई भी नाली का पानी न पिए। यह बहुत खतरनाक है। शहर में कहीं साफ पानी दिखाई ही नहीं देता था सिवाय नाली और नालों के। छतों पर पक्षियों के प्रति दयालु लोग ही पानी रख देते हैं।

तीन-चार दिन कौमी के दोस्त खूब घूमे-फिरे, लेकिन उन्हें वहां रहकर संतुष्टि नहीं हुई। वह कौमी से वापस अपने गांव जाने की बात कहने लगे। कौमी ने कहा, दोस्तो, कुछ दिन और रहो। लेकिन तीनों घूम-घूम कर और वहां के वातावरण को देखकर परेशान हो गए थे। गांव में तो वे बहुत दूर-दूर तक घूमने चले जाते थे। साफ पानी की वहां कमी नहीं थी, जगह-जगह नहर व तालाब आदि थे। फलों की कोई कमी नहीं थी।
बाग-बगीचे बहुत थे, पर शहर में ये सब कहां? चारों तरफ मकान ही मकान थे और जगह-जगह गंदगी युक्त नालिओं में बहुता हुआ पानी। खैर, एक दिन कौमी के साथ तीनों दोस्त अपने गांव वापस आ गये। गांव आकर उन्होंने राहत की सांस ली। जब उन्होंने कौमी से पूछा कि दोस्त तुम वहां ऐसे वातावरण में कैसे रह लेते हो, तो कौमी कहता- क्या करें, हमें तो वहां की आदत हो गई है। जो जहां रहता है, उसे वहीं की आदत पड़ जाती है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कंबो शहर की यात्रा