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झारखंड में बिजली के लिए हाहाकार

झारखंड में बिजली को लेकर त्राहि-त्राहि मची है। सूबे का हर शहर बिजली की कटौती से त्रस्त है। गांव में तो बिजली का दर्शन ही दुश्वार है। लोड शेडिंग के नाम पर राजधानी के लोग भी हलकान हैं। घर, अस्पताल और कल-कारखाना बिजली की मार से सभी कराह रहे हैं। अस्पतालों में बड़े ऑपरशन टाले जा रहे हैं, जेनरटर जवाब देने लगे हैं। दुकानों-दफ्तरों की दशा और खराब है। इधर, बिजली विभाग के अधिकारी इससे बेखबर चैन की बंशी बजा रहे हैं। बिजली नहीं रहने से पानी की सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है। लोड शेडिंग का कोई समय नहीं है, जब चाहा लाइन बिजली काट दी गयी। जबकि हाइकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दे रखा है कि लोड शेडिंग की जानकारी नियमित रूप से ग्राहकों को दी जाये। लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी कोर्ट के आदेश की भी परवाह नहीं करते। सरकार भी कान में तेल डालकर बैठी है। लोग परशान हैं, उसकी बला से। बात-बात पर सड़क पर उतरनेवाली राजनीतिक पार्टियां और उसके झंडाबरदार भी मुंह छिपाये चल रहे हैं। सत्ता के लोग मलाई काट रहे हैं और विपक्ष को अपने झंझाल से ही फुरसत नहीं मिल रही। लोगों को निर्बाध बिजली कैसे मिले, इसके लिए सिर्फ फाइलों पर ही घोड़े दौड़ रहे हैं। राज्य के अधिकांश गांवों में बिजली नहीं है, जहां है भी, सिर्फ दिखावे के लिए। हां, इतना जरूर है कि कागजों पर कार्रवाई में ये अधिकारी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।ड्ढr झारखंड को जितनी बिजली मिलनी चाहिए, उससे आधी ही मिल रही है। पीटीपीएस दो यूनिट से उत्पादन बंद है। दो नंबर यूनिट से 40 मेगावाट, टीवीएनएल से 1मेगावाट उत्पादन हो रहा है। सेंट्रल पूल से भी 1मेगावाट बिजली मिल रही है। डीवीसी कमांड एरिया को छोड़ राज्य में दिन में 650 और पीक आवर में 750 मेगावाट बिजली की डिमांड है। जबकि बोर्ड को मिल रही 460 मेगावाट बिजली। उसमें से भी रलवे को 150 मेगावाट देने के बाद बोर्ड के पास सिर्फ 310 मेगावाट बिजली बचती है। राजधानी में बिजली की डिमांड 200 मेगावाट है। लेकिन मिल रही है आधी से कम। मार गरमी के लोगों को न बाहर चैन है न घर में। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई ठप है। युवक कंपीटीशन की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। गृहिणियां घर के अंदर गरमी से परशान हैं। बुजुर्ग पंखे के अभाव में रतजगा कर रहे हैं। बिजली की इस दुर्दशा की कथा सिर्फ राजधानी रांची की ही नहीं, हर शहर की है।ड्ढr जमशेदपुर में 150 मेगावाट डिमांड के बदले 60 मेगावाट दी जा रही है। धनबाद में पिछली 24 तारीख से ही बिजली की लगातार कटौती की जा रही है। हर इलाके में दो-दो घंटे की लोड शेडिंग से त्राहि-त्राहि मची हैं। देवघर को 50 मेगावाट डिमांड के विरुद्ध 23 मेगावाट बिजली मिल रही है। चतरा में छह से सात घंटे ही बिजली मिल रही है। सबसे खराब स्थिति प्रतापपुर और हंटरगंज प्रखंड में है।ड्ढr लोहरदगा को पिछले 48 घंटे में बमुश्किल 15 घंटे ही बिजली मिली। पलामू प्रमंडल में बिजली की स्थिति बिलकुल चरमरा गयी है। पलामू, गढ़वा और लातेहार जिला को मात्र 20 मेगावाट बिजली मिल रही है। सिमडेगा में घंटो बिजली गुल और आयी तो मात्र एकाध घंटे के लिए। गुमला को आठ मेगावाट बिजली की जरूरत है, मिल रहा है मात्र तीन मेगावाट। कोडरमा-हाारीबाग में 26 अप्रैल को सुबह 0 से 10.50 बजे तक, दोपहर 1.10 से 1.25 तक, शाम 7.50 से 0 तक बिजली नहीं रही।

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