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बीएचयू के क्वार्टरों में रहने पर अब 10 फीसदी टैक्स

बीएचयू में पिछले कुछ दिनों से एक नया उबाल है। यह 10 फीसदी अतिरिक्त कर के मुद्दे पर है। परिसर में रहने वाले अध्यापकों, अधिकारियों और कर्मचारियों को अब आवासीय सुविधा पर यह कर देना होगा। इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गयी है और फॉर्म भरवाए जा रहे। इसका आधार यह है कि वर्ष 2013 में केंद्र सरकार ने सरकारी प्रतिष्ठानों की तरह सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को इस दायरे में ला दिया था। नए फरमान पर विरोध की सुगबुगाहट भी हो रही है।

अध्यापकों का कहना है कि बीएचयू स्वायत्तशासी संस्थान है, लेकिन इसके कर्मचारियों को वेतन केंद्र सरकार देती है। नियमानुसार आवास भत्ता भी दिया जाता है, लेकिन परिसर में रहने वालों को यह भत्ता नहीं मिलता। उनसे किराये के रूप में लाइसेंस शुल्क भी लिया जाता है। आवास के लिए जो भत्ता सरकार की ओर से आता है, वह विश्वविद्यालय के कोष में जमा होता है। फिर अलग से 10 प्रतिशत कर लगाने का मतलब नहीं समझ में आता। वैसे भी यह 10 प्रतिशत कर लगा तो उन्हें अपने बेसिक सैलरी से आयकर समेत दो तरह का कर देना पड़ेगा। जबकि परिसर से बाहर रहने वालों को जो आवास भत्ता मिलता है, उस पर 15 प्रतिशत कर लगता है। किराये की रसीद दिखाने पर इसमें भी रियायत दी जाती है।

वैसे जानकार बताते हैं कि ऑयल ऐंड नेचुरल गैस कारपोरेशन (ओएनजीसी) ने इस मुद्दे पर सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने इसकी अपील खारिज कर दी। मगर विवि से जुडे़ लोगों का कहना है कि ओएनजीसी अलग संस्था है और बीएचयू शिक्षण संस्थान है। इसके अलावा अभी किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय में यह व्यवस्था लागू नहीं की गयी है। फिर बीएचयू में इतनी हड़बड़ी का क्या मतलब है।

यह सरकार का नियम है
इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी अभय ठाकुर का कहना है कि यह सरकार का नियम है और हमें इसका पालन करना है। अगर किसी को कोई आपत्ति है तो वह सरकार के समक्ष इसे दर्ज करा सकता है। अगर यह विश्वविद्यालय स्तर का मुद्दा होता तो इसकी समीक्षा की जा सकती थी, लेकिन सरकारी मामलों में हम ऐसा नहीं कर सकते हैं।

कार्यकारिणी ने निर्धारित किया है किराया
जानकार कहते हैं कि विश्वविद्यालय परिसर में रहने वालों के लिए बीएचयू की कार्यकारिणी परिषद ने विभिन्न श्रेणियों में किराया निर्धारित किया है। यह उन्हें लाइसेंस शुल्क के रूप में देना पड़ता है। अगर इसके बावजूद टैक्स लिया जा रहा है, तो यह उन पर भी लागू होना चाहिए, जिनपर लाइसेंस शुल्क देने की बाध्यता भी नहीं है। इनमें कुलपति, रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी वॉर्डेन शामिल हैं।

 

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