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पूर्व मंत्री अहिरवार को तीन साल की सजा

भ्रष्टाचार के दो मामलों में दोषी करार दिए गए बबीना विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक व मायावती सरकार में राज्य मंत्री रहे रतन लाल अहिरवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। विशेष जज नीरजा सिंह ने दोनों मामलों में पूर्व विधायक पर 40 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंका है।

दोनों मामलों में अहिरवार पर फर्जी यात्रा भत्ता के बिलों को सत्यापित करने का इल्जाम है। इससे लाखों के सरकारी धन की हानि हुई। अदालत ने इनमें से एक मामले में अहिरवार के गनर रहे हेड कांस्टेबिल शिवनारायन सिंह को पांच साल की सजा व 20 हजार के जुर्माने से दंडित किया है। वहीं प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तैनात रहे सहायक आंकिक मो. अफान सिद्दीकी व नवाब सिंह को तीन-तीन साल की सजा व 20-20 हजार के जुर्माने से दंडित किया है। सीबीआई की वकील पूर्णिमा गुप्ता के मुताबिक एक मुल्जिम कांस्टेबिल प्रेम बहादुर सिंह की मौत हो चुकी है।

हाईकोर्ट ने दिया था मामले की सीबीआई जांच का आदेश
31 जनवरी, 1999 को इस मामले की एफआईआर झांसी के नवाबाद थाने में भ्रष्टाचार निवारण संगठन, अपराध अनुसंधान विभाग ने दर्ज कराई थी। मामले की जांच के बाद मुल्जिमों के विरुद्ध आरोप साबित नहीं होने का हवाला देते हुए झांसी की सीजेएम अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी गई। लेकिन अंतिम रिपोर्ट को सीजेएम ने नामंजूर कर दिया। साथ ही अपराध का संज्ञान लेते हुए सभी मुल्जिमों को चार दिसंबर, 2000 को तलब कर लिया। इस आदेश को मुल्जिम नवाब सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। सात मई, 2001 को हाईकोर्ट ने झांसी के थाना नवाबाद को इस मामले की विवेचना जारी रखने जबकि अग्रिम विवेचना के लिए सीबीआई को आदेशित कर दिया। 26 जुलाई, 2001 को सीबीआई ने इस आदेश के अनुपालन में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच के बाद उसने इस मामले मुल्जिम अहिरवार के खिलाफ दो आरोप पत्र दाखिल किए।

क्या है मामला
वर्ष 1993-94 के दौरान हुए लाखों के इस घोटाले की जांच में सीबीआई ने पाया कि इस दौरान झांसी के बबीना विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन विधायक रतन लाल अहिरवार की सुरक्षा में हेड कांस्टेबिल शिवनारायन सिंह व कांस्टेबिल प्रेम बहादुर सिंह गनर के रूप में तैनात थे। एक फरवरी, 1993 से 31 जनवरी, 1994 तक 65 यात्रा भत्ता के बिलों द्वारा शिवनारायन सिंह ने एक लाख 50 हजार 473 रुपए 40 पैसे जबकि एक अपै्रल, 1993 से 31 जनवरी, 1994 तक प्रेम बहादुर सिंह ने एक लाख 48 हजार 694 रुपए पांच पैसे का भुगतान प्राप्त किया। जांच में सामने आया कि इन सभी यात्रा भत्ता के बिलों को रतनलाल अहिरवार ने सत्यापित किया है। उनकी सुरक्षा में तैनात इन दोनों पुलिस वालों ने दिल्ली से भोपाल, झांसी, कानपुर, लखनऊ आदि स्थानों पर शताब्दी टे्रन में प्रथम श्रेणी के वातानुकूलित कोच व टैक्सी द्वारा यात्राएं कीं जबकि वे दोनों इसके पात्र नहीं थे। इसके अलावा डीए की दरें व सिटी माइलेज भी अनियमित रूप से प्राप्त की गई। जांच में यह भी सामने आया कि इन सभी बिलों को तत्कालीन सहायक आंकिक नवाब सिंह व मो. अफान सिद्दीकी ने बगैर किसी आपत्ति के नियम विरुद्ध पास कराया।

 

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