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कबीर का कबीरचौरा लौटने वाला है कबीरकाल में

संत कबीरदास का कबीरचौरा स्थित मठ कबीर के काल में लौटने वाला है। नीदरलैंड के विशेषज्ञ तकनीक के जरिए लोगों को 14वीं शताब्दी का माहौल, उस माहौल में कबीर की दिनचर्या, जीवन साधना की झलक दिखाएंगे। इसके लिए लगभग 35 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बना है। इसके तहत संत कबीर की कुटिया, स्तंभ एवं एक संग्रहालय का निर्माण होगा। कबीर मठ के आचार्य विवेक दास ने बताया कि लगभग दो वर्ष के इस प्रोजेक्ट में कुटिया पहले बनायी जाएगी।

मठ आधुनिक जरूर होगा मगर उसमें प्रयोग में लाई जाने वाली तकनीकी के जरिए 14वीं शताब्दी के महान संत का जीवन चरित हूबहू प्रदर्शित होगा। कबीर की दिनचर्या कैसी थी, उस समय मठ का माहौल और मठ के आसपास का वातावरण कैसा था, उनके समय की समकालीन गतिविधियां किस प्रकार की थीं-इन सभी को तकनीक के जरिए दर्शाया जाएगा। कताई-बुनाई करते कबीर दिखेंगे तो पाश्र्व से गूंजेगी एक आवाज-‘आइए, बैठिए। कबीर के घर में आपका स्वागत है।’ कुटिया के साथ एक संग्रहालय भी प्रस्तावित है। इसके लिए पुरानी धर्मशाला के 18 कमरों को ध्वस्त कराने की तैयारी है।

नीदरलैंड के पार्क से मिली प्रेरणा
कबीरचौरा मठ में कबीर दास की प्रस्तावित कुटिया का प्रोजेक्ट नीदरलैंड के विशेषज्ञों ने बनाया है। ये विशेषज्ञ संत कबीर के अनुयायी हैं। उनका कबीरगादी को इस रूप में ढालने का कारण भी अचानक बन आया। अनुयायियों के बुलावे पर नीदरलैंड यात्रा पर गए संत विवेकदास ने वहां 5 एकड़ में बना एक पार्क और ङील देखी। ‘मधुरम’ पार्क में कुछ वास्तविक और कुछ कृत्रिम नभचर एवं जलचर दिखे। कृत्रिम पशु-पक्षी भी इस तरह घूम फिर रहे थे मानों सजीव हों। उन्हें सेंसर के जरिए सजीव बनाया गया है। एक मोम का पुतला दिखा माइक लिए। उससे निकल रही आवाज दूर से किसी उपदेशक का आभास करा रही थी। विवेक दास ने कहा कि हमने उसी समय मूल गादी में भी उसी तरह की व्यवस्था कराने का संकल्प ले लिया।

ऐसी होगी मूल गादी
झोंपड़ी की शक्ल में बनेगा कमरा
कमरे में होगी खाट, करघा व अन्य सामग्रियां
कमरे में झरोखेनुमा बनेंगी खिड़कियां
कमरे के चारो ओर बनेगा परिक्रमा पथ
 परिक्रमा पथ पर पदचाप से ही खुलेंगी खिड़कियां
कमरे के पास बनेगा 50 फीट ऊंचा स्तंभ
स्तंभ पर होगी इलेक्ट्रानिक ढिबरी जो सतरंगे कपड़े की रोशनी बिखेरेगी
हर आगंतुक को दिल में उतर जाने वाली भाषा में 15 मिनट की संतवाणी सुनाई देगी

संत वाणी को आवाज देने के लिए होगी सुयोग्य वाचक की तलाश
संत विवेक दास के अनुसार, संत वाणी हमेशा मधुर और दिल में उतर जाने वाली होती है। कोशिश ऐसी स्क्रिप्ट तैयार करने की है जिसकी भाषा सरल हो। साथ ही उसे बोलने वाली आवाज ऐसी हो जिससे श्रोता को उसे ग्रहण करने में कठिनाई न हो। ऐसी आवाज वाले सुयोग्य वाचक की तलाश होगी।

संग्रहालय यानी संतों की हाट
कबीरचौरा मठ में प्रस्तावित संग्रहालय को संत विवेक दास ‘संतों की हाट’ नाम देना चाहते हैं। ऐसे संत जिन्होंने कबीर की ही तरह श्रम और कर्म को प्रतिष्ठा दी। आध्यात्म की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी मूल काम नहीं छोड़ा। आजीवन उसे करते रहे। यह श्रम व कर्म स्थापित करने वाला देश में संतों का सबसे बड़ा केन्द्र बने, ऐसी कल्पना व संकल्प है। यहां प्रत्येक संत की स्टैच्यू होगी, उनके जीवन से जुड़ी जानकारियां, उपदेश व उनके साहित्य होंगे। संग्रहालय के लिए 700 पांडुलिपियों का संग्रह हो चुका है।  

संथाल की पीली और सावई मिप्ती
कुटिया और उसकी खिड़कियों के दरवाजे खुलेंगे सेंसर विधि से मगर पूरा निर्माण 14वीं शताब्दी के अनुसार होगा। कुटिया की दीवार की चुनाई संथाल की पीली मिप्ती से जबकि सफेदी संथाल की सावई मिट्टी से होगी। संथाल परगना के मूल निवासी संत विवेक दास ने कहा कि  संथाल में मिलने वाली इन मिप्तियों की खासियत है। पीली मिप्ती में सीमेंट से भी अधिक चिपकने की शक्ति होती है। जबकि पत्थरों के नीचे से निकाली जाने वाली सावई मिप्ती की सफेदी चूने को भी मात करने वाली होती है। उसमें टिकाऊपन भी चूने की अपेक्षा कई गुना होता है।

शिलान्यास आज 12 बजे बिहार के सीएम करेंगे
वाराणसी। कबीर की हाईटेक कुटिया का शिलान्यास बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांङी और यूपी के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह संयुक्त रूप से करेंगे। संत विवेक दास के अनुसार, शिलान्यास सुबह 11 बजे होगा। इस  मौके  पर बिहार के खनन मंत्री रामलखन राम रमन, यूपी की संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुणा कोरी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री देवेन्द्रनारायण यादव, बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष किशोर कुणाल समेत अनेक विशिष्ट जन मौजूद रहेंगे।

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