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इसरो ने दस उपग्रह छोड़ रचा इतिहास

भारतीय अतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने आज उस समय एक और मील का पत्थर स्थापित कर दिया जब उसने एक साथ 10 उपग्रह को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। यह पहला मौका है जब किसी देश ने एक साथ 10 उपग्रह को एक साथ स्थापित किया है। यह प्रक्षेपण पूरी तरह से स्वदेश में निर्मित पीएसएलबी-सी से छोड़े गए। सोमवार तड़के प्रक्षेपण के 20 मिनट के अंदर ही सभी उपग्रह सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया। छोड़े गए दस उपग्रह में 2 भारतीय और 8 विदेशी उपग्रह हैं। इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी- सी ने यहां से नौ बजकर 23 मिनट पर 60 किलोग्राम वजन का भारतीय दूर संवेदी उपग्रह काटर्ोसेट 2 ए और 83 किलोग्राम वजन का भारतीय मिनी उपग्रह आईएमएस-1 तथा दूसरे देशों के 50-50 किलोग्राम वजन के आठ नैनो उपग्रहों को लेकर उड़ान भरी और उन्हें अंतरिक्ष में उनकी कक्षाआें में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। पीएसएलवी की यह तेरहवीं उड़ान है। पीएसएलवी ने उड़ान भरने के 885 सेंकेड बाद भारतीय दूर संवेदी काटर्ोसेट-2 (ए) को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया। उसके लगभग 45 सेंकेड बाद आईएमएस-1 को भी उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया गया। इसके साथ ही दूसरे देशों के आठ नैनो उपग्रह भी एक के बाद एक संबंधित कक्षाआें स्थापित कर दिए गए। पूरी प्रक्रिया में लगभग 24 मिनट लगे। उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण से मिशन नियंत्रण केंद्र में अंतरिक्ष विज्ञानियों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। खासकर इसरो प्रमुख जी माधवन नायर इस प्रक्षेपण से काफी खुश थे और वह अपनी खुशी लोगों में बांट रहे थे। नायर के लिए जुलाई 2006 में जीएसएलवी की असफलता को छोड़कर यह आठवीं सफलता थी। सबसे बड़ी बात है कि पहली बार इसरो ने दस उपग्रहों को एकसाथ प्रक्षेपित किया है। काटर्ोसेट-2 (ए) में एक विशेष प्रकार का कैमरा पैन और चित्रों को रखने के लिए एक विशेष प्रणाली है। यह उपग्रह शहरी आधारभूत ढांचे और परिवहन प्रणाली की योजना तैयार करने, उसकी निगरानी आदि में सहायक होगा। आईएमएस-1 में दो विशिष्ट कैमरे एमएक्स और एचवाईएस लगे हुए हैं। पहला कैमरा जहां विकासशील देशों को चित्र उपलब्ध कराएगा वहीं दूसरा अपने देश के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को पहली बार एकसाथ दस उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित कर एक रिकार्ड कायम किया। इस सफलतापूर्वक प्रक्षेपण के बाद अब इसरो की नजर चंद्रयान मिशन है। इसरो ने कहा है कि वह 2007-08 में चंद्रमा तक पहुंचने की कोशिश करेगा। उल्लेखनीय है कि 200में चंद्रयान-1 मिशन प्रस्तावित है।ड्ढr

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