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कहीं रामपाल के पाकिस्तान से संबध नहीं : संत विवेक दास


कबीरचौरा स्थित कबीरमठ मूलगादी के आचार्य संत विवेक दास ने कहा कि हिसार के कथित संत रामपाल की गतिविधियों, उसकी आय के स्नोतों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। संत विवेक दास ने संदेह जताया कि कहीं पाकिस्तान से रामपाल के सम्पर्क न रहे हों। क्योंकि भक्तों के चंदे से भव्य आश्रम का निर्माण और अन्य वैभव एकाएक नहीं आ सकता।

वह मंगलवार को कबीरचौरा मठ में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। रामपाल का खुद को कबीरपंथ का अनुयायी बताने सम्बंधी बयान को धूर्तता करार देते हुए विवेक दास ने कहा कि हरियाणा के हिसार में कबीर साहब के अनुयायी संत गरीब दास का स्थान है। हरियाणा में उनकी बहुत प्रतिष्ठा है। रामपाल गरीबदासी परंपरा से जुड़ा और बाद में खुद को कबीर का अवतार घोषित कर दिया।

दरअसल उसने अपनी मार्केटिंग के लिए कबीरदास के नाम का गलत उपयोग किया। फिर, कांग्रेस और भाजपा ने उसे संत बना दिया। जबकि हम सन्-2002 से उसकी गतिविधियों के कारण उसका विरोध करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि  कबीर का अनुयायी 200 राइफलों के साये में चले तो फिर वह साधु या संत कहलाने का अधिकारी नहीं है। विवेक दास ने कहा कि ये राइफलें कहां से आईं, किनके सहयोग से आश्रम में इतनी सम्पत्ति खड़ी हो गई-इन सब बातों के खुलासे के लिए उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

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