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नेताओं पर जोर नहीं इश्तिहार के पानी का

विज्ञापन कई बार कड़वी सच्चाइयों का सामना करा देते हैं। शाहरुख खान गोरा बनाने वाली एक क्रीम के लिए मॉडलिंग करते हैं। मेरे एक पचास वर्षीय मध्यमवर्गीय मित्र ने गोरा होने की कोशिश में इस क्रीम का इस्तेमाल शुरू कर दिया। उनकी बीवी ने इस पर उसे मारक ताकीद दी- महंगाई तुम्हारी इनकम को महीने के पहले ही हफ्ते में ऐसे पीटकर रख देती है,  जैसे इन दिनों अक्षय कुमार की फिल्म को पहले ही दिन पब्लिक पीट देती है। गोरा बनकर शाहरुख खान तो और कई गर्ल-फ्रेंड्स बना सकता है,  उन्हें अफोर्ड भी कर सकता है। तुम्हारी औकात तो हर हफ्ते दो पिज्जा अफोर्ड करने तक नहीं है,  गोरेपन से बनी नई गर्लफ्रेंड कैसे अफोर्ड कर पाओगे?  गोरा बनने के इच्छुक अधिकांश मध्यवर्गीय भारतीयों को यह बात गहरे तक चोट कर सकती है।

चोट की गहराई ज्यादा हो,  तो माना जा सकता है कि इस कथन में सच्चाई है। एक इश्तिहार है बोतलबंद पानी के एक ब्रांड का,  जिसमें एक बेटी उस ब्रांड का पानी पीकर अपने पापा को यह सच बताती है कि वह फ्रेंड्स के साथ पढ़ाई नहीं कर रही है,  बल्कि एक पिकनिक-स्पॉट पर अपने दोस्तों के साथ है। वह वाला पानी पीकर सच बोलने का मन कर आया। इस इश्तिहार को सच मानते हुए मन कर रहा है कि यह पानी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस को पिलाया जाए। फिर संभव है कि फडनवीस वह वाला पानी पीकर शिवसेना के उद्धव ठाकरे को फोन करें- मैं सच बोलना चाहता हूं कि शरद पवार से समर्थन लेकर सरकार चलाने में मुझे कतई मजा नहीं आ रहा है। तुम्हारी-हमारी दोस्ती की बात अलग थी। पर नहीं,  सच बुलवाने वाला पानी भी नेता के आगे पानी मांग जाएगा। मौका ताड़कर यह पानी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पिलाया जाए। यह पानी पीकर शरीफ भारतीय पीएम को फोन करके यह कह सकते हैं- मैं सच बोलना चाहता हूं अब। तस्कर-स्मगलर दाऊद इब्राहीम पाकिस्तान में ही है। पर नहीं,  सच बुलवाने वाला पानी ग्लोबल झूठे के आगे खुद पानी मांगने लगेगा। जब पानी नेताओं से सच नहीं बुलवा पा रहा है, तो भाई बाकी नन्हे-मुन्हे सचों का हम करेंगे क्या?

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  • Web Title:नेताओं पर जोर नहीं इश्तिहार के पानी का