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मनचलों के खिलाफ

रोहतक में एक बस में मनचले लड़कों द्वारा दो लड़कियों के साथ की गई छेड़छाड़ की जितनी निंदा की जाए,  वह कम है,  और उसके बाद उन लड़कियों द्वारा किए गए तीव्र प्रतिरोध और उनकी हिम्मत की जितनी प्रशंसा की जाए,  कम होगी। जिस महिला ने इस घटना का वीडियो बनाकर कानून और समाज की सच्ची सेवा की,  वह भी प्रशंसा के योग्य है। अब रोहतक पुलिस पर निर्भर करता है कि वह कितनी ईमानदारी के साथ अपना कर्तव्य निभाती है और पीड़ित लड़कियों को न्याय दिलवाती है। इस पूरे प्रकरण में आश्चर्यजनक बात यह है कि लड़कों के परिवार वाले इस आधार पर लड़कियों से शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं कि उन लड़कों का सेना में चयन हो चुका है और वे जल्दी ही सेना में शामिल होने वाले हैं। यदि इस आधार पर उन लड़कों के साथ कोई रियायत बरती गई,  तो यह न केवल उन लड़कियों के साथ अन्याय होगा,  बल्कि भारतीय समाज और सेना,  दोनों के साथ अन्याय होगा। ऐसे वाहियात लड़कों का सेना में भर्ती होना देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण साबित हो सकता है,  ऐसे लोगों के कारण देश को कभी भी शर्मिदगी उठानी पड़ सकती है।
राजेंद्र गोयल, फरीदाबाद
goyalrp68@yahoo.com

दिलेरी को सलाम

रोहतक में चलती बस में तीन आवारा मनचलों की दो बहनों द्वारा की गई पिटाई से पूरा देश गदगद है। लेकिन लानत है उन सभी मूकदर्शकों और ड्राइवर व कंडक्टर को,  जो तमाशा देखते रहे। दोनों बहनें इस साहस के लिए बधाई की हकदार हैं। यह घटना उन किशोरियों,  युवतियों और महिलाओं के लिए एक मिसाल है,  जो ऐसी घटनाओं को चुपचाप सहन कर लेती हैं और विरोध तक प्रकट नहीं करतीं। यह घटना संदेश है उन लफंगों और मनचलों के लिए,  जो सार्वजनिक स्थलों पर अपनी अश्लील हरकत से मानव समाज को कलंकित करने का प्रयास करते हैं। समाज को जागृत करने के लिए ऐसे प्रयासों को पुरस्कृत और अलंकृत करने की जरूरत है। सर्वसाधारण की मूकदर्शिता को भी झकझोड़ने की आवश्यकता है,  जिससे कोई भी अनैतिक कार्य करने से पहले सोचने को विवश हो जाए।
सत प्रकाश सनोठिया,  रोहिणी

नहीं बना चुनावी मुद्दा

झारखंड राज्य में जेपीएससी परीक्षा घोटला हुआ। इस घोटाले की जांच की आंच कई लोगों को महसूस हुई और कई बड़े अफसर भी लपेटे में आए,  लेकिन झारखंड सरकार की लापरवाही की वजह से उन पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। इस परीक्षा के कई उम्मीदवार पीटी में ही फेल थे,  लेकिन उनकी उत्तर पुस्तिका में हेरफेर करके उन्हें पास कर दिया गया। मुख्य परीक्षा में एक उम्मीदवार ऐसा भी था,  जिसने परीक्षा का फॉर्म नहीं भरा,  लेकिन उसे परीक्षा में बैठाकर सफल घोषित कर दिया गया। राज्य के मेधावी छात्रों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि विधानसभा चुनाव में किसी भी राजनीतिक पार्टी ने इस घोटाले को अपना चुनावी मुद्दा नहीं बनाया। इसमें कोई दोराय नहीं कि आज गलत तरीके से चयनित अफसरों के कारण ही राज्य का विकास बाधित हो रहा है।
रघुनाथ सिंह
raghunathsingh.jsr@gmail.com

नेता नहीं,  क्षत्रप कहिए

आजादी से पहले और उसके तुरंत बाद के राष्ट्रीय नेता सबके नेता होते थे,  लेकिन आजादी के बाद धीरे-धीरे तथाकथित ‘क्षत्रप’ उभरने लगे। फलस्वरूप आज जो भी नेता हैं,  वे सिर्फ किसी एक जाति या वर्ग का हिमायती बनकर अपना स्वार्थ साध रहे हैं। हाल यहां तक पहुंच गया है कि देश के अधिकतर घरों में अब लोग सिर्फ अपनी जाति के नेता की तस्वीर लगाते हैं। राजनीतिक तबके में संपूर्ण भारत और संपूर्ण भारतीय समाज का प्रतिनिधित्व करने की अभिलाषा का लोप हो गया है। क्या यह एक मजबूत राष्ट्र का सपना देखने वालों के लिए चिंता की बात नहीं है?
सुभाष लखेड़ा,  द्वारका,  नई दिल्ली
subhash.surendra@gmail.com

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