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आरबीआई की नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं

आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को नीतिगत ब्याज दरों को यह कहते हुए अपरिवर्तित रखा कि दरों में बदलाव करना अभी जल्दी होगा। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि यदि मुद्रास्फीति के दबाव में कमी का रुक्षान बना रहा और राजकोषीय स्थिति काबू में रखने के लिए सरकार अपनी ओर से पहल करती रही तो अगले साल की शुरुआत में दरों में कटौती की जा सकती है।
 
उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति के रख में अभी कोई बदलाव करना जल्दबाजी होगा। हालांकि यदि मुद्रास्फीति का मौजूदा रुक्षान और मुद्रास्फीतिक प्रत्याशाओं में बदलाव बरकरार रहता है और राजकोषीय घटनाक्रम उत्साहजनक रहता है तो अगले साल मौद्रिक नीति में बदलाव का रुख अपनाया जा सकता है और यह नियमित नीतिगत समीक्षा चक्र से अलग से भी किया जा सकता है।

आरबीआई के निर्णय के अनुसार अभी रेपो दर 8 प्रतिशत पर जबकि नकद आरक्षी अनुपात [सीआरआर] भी चार प्रतिशत पर बना रहेगा। रेपो दर वह दर होती है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उनकी फौरी जरूरत के लिए धन उधार देता है तथा सीआरआर बैंकों की जमा का वह हिस्सा है जिसे उन्हें रिजर्व बैंक के नियंत्रण में रखना होता है और इस पर उन्हें रिजर्व बैंक से कोई ब्याज नहीं मिलता।

आरबीआई की जारी द्वैमासिक मौद्रिक नीति की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
1. अल्पकालिक ऋण (रेपो) दर आठ प्रतिशत पर अपरिवर्तित
2. नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) चार प्रतिशत पर अपरिवर्तित
3. सांविधिक नकदी अनुपात 22 प्रतिशत पर बरकरार ताकि बैंकों का कोष स्रोत बना रहे
4. चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान
5. मार्च 2015 के अंत तक खुदरा मुद्रास्फीति छह प्रतिशत रहने का अनुमान
6. खुदरा मुद्रास्फीति के नवंबर में और कम होने लेकिन दिसंबर में बढ़ने की संभावना
7. मौजूदा हालात में मौद्रिक नीति के रख में बदलाव करना जल्दी होगा
8. राजकोषीय, मुद्रास्फीतिक हालात में सुधार होने पर आगे ब्याज दरों में कटौती का संकेत
9. कम राजस्व संग्रह राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के लिए खतरा
10. मौद्रिक नीति की अगली द्वैमासिक समीक्षा तीन फरवरी को

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