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बिटिया हो तो ऐसी... कर लिया यूनिवर्सिटी टॉप

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की पहली टॉपर असुरन की साची अग्रवाल बनीं। स्वर्गीय अजय अग्रवाल की बेटी साची ने यह उपलब्धि तमाम कठिनाइयों के बीच हासिल की। उनकी मां रश्मी ने कोचिंग पढ़ाकर उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। जब साची की उम्र महज आठ साल थी तभी पिता का हाथ सिर से उठ गया था। दो बच्चों के साथ रश्मी के सामने दोहरी चुनौती थी। पालन पोषण के साथ बच्चों को अच्छी तालीम दिलाना। बेटी को विश्वविद्यालय की तरफ से सर्वाधिक तीन गोल्ड मेडल मिलते देख मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

विश्वविद्यालय की पहली वर्षगांठ पर सोमवार को आयोजित समारोह में बीटेक इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की छात्रा साची अग्रवाल का नाम जब पुकारा गया और बताया गया कि इन्होंने न सिर्फ इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में टॉप की है, बल्कि इन्होंने यूनिवर्सिटी में अव्वल रहीं तो भीड़ में बैठी मां रश्मी इस दुर्लभ पल को अपनी मोबाइल में कैद करने लगीं। मां को अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर तो बेटी को भी अपनी मां के त्याग और परिश्रम पर फख्र था।

रश्मी कहती हैं कि कम उम्र में (2001 वर्ष) पिता का साया छिन गया। अपने मामा और चाचा के सहयोग से वह यहां तक पहुंची है। रश्मी ने कहा कि आज उनकी बेटी ने वह खुशी दी जिसकों वह बयां नहीं कर सकती हैं। डबडबाती आंखों और रुंधे हुए गले से बोलीं, आज इसके पिता होते तो वह कितने खुश होते। उन्होंने बताया कि दो बच्चों में साची बड़ी है छोटा बेटा एनआईटी प्रथम वर्ष का छात्र है। साची कहती हैं कि उनकी मां ने ट्यूशन पढ़ाकर उन्हें यह मुकाम हासिल कराया है। अब उसकी मंजिल आईईएस (इण्डियन इंजीनियरिंग सर्विस) है।

 

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