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एड्स पीड़ितों से भेदभाव पर दो साल की सजा होगी

एड्स पीड़ितों से भेदभाव पर दो साल की सजा होगी

एचआईवी पीड़ितों के साथ अब सामाजिक भेदभाव करना अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। ‘एचआईवी-एड्स बचाव व नियंत्रण विधेयक-2014’ में पीड़ितों के अधिकार मजबूत करने की पैरवी की गई है। यदि संसद से यह विधेयक मंजूर हो जाता है, तो ऐसे मरीजों के साथ भेदभाव करने पर 10 हजार का जुर्माना व दो वर्ष की सजा हो सकती है।

पीपुल्स लिविंग विद एचआईवी पॉजिटिव, वल्ड विजन इंडिया और कानूनविदों की मदद से तैयार किए गए इस विधेयक के ड्राफ्ट में इलाज संबंधी कई पहलुओं पर ध्यान दिया गया है। विधेयक के प्रारूप समिति के प्रमुख अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने बताया कि फरवरी 2014 में विधेयक को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत किया गया था। इसमें एचआईवी संक्रमित मरीजों के रहने, खाने, शिक्षा एवं अन्य मूलभूत अधिकारों को मजबूत करने की पैरवी की गई। दो साल पूव बिहार के सहरसा में एचआईवी संक्रमित बच्चे को गांव से निकालने की घटना को देखते हुए सामाजिक बहिष्कार को अब अपराध माना जाएगा। नि

गरानी के लिए राज्य स्तर की एड्स कंट्रोल सोसाइटी में एक अधिकरी की नियुक्ति होगी। ऐसी घटनाओं का आंकड़ा तैयार कर यह नेशनल एड्स कंट्रोल सोसाइटी को भेजेगा। फिर क्षेत्रीय पुलिस व न्यायालय की मदद से आरोपी को सजा दिलाई जाएगी।

 

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