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संसद के पहले सप्ताह में हुआ रिकार्डतोड़ काम

संसद के पहले सप्ताह में हुआ रिकार्डतोड़ काम

संसद में कमजोर पड़ चुके विपक्ष और एनडीए की चतुराई से कामकाज गति पकड़ने लगा है। शीत सत्र के पहले ही सप्ताह में लोकसभा ने पांच और राज्यसभा ने तीन विधेयक पारित किए। दोनों सदनों में कालाधन जैसे जटिल मुद्दे पर सफल बहसें भी हुईं। सोमवार से शुरू हुए सत्र का पहला दिन शोक के कारण नहीं हो सकता था। चार दिनों में लोकसभा से पांच विधेयकों का पारित होना बेहद सकारात्मक संकेत है। अरसे बाद यह सुखद नजारा संसद में दिखा है। पिछली यूपीए-2 सरकार में शायद ही कभी इतना काम हुआ।

संसदीय कार्य मंत्रालय के अनुसार लोकसभा में जो पांच बिल पास हुए, उनमें दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट एमेंडमेंट बिल, लेबर लॉ फर्निशिंग रिकाड्र्स एमेंडमेंट बिल, सेंट्रल यूनिवर्सिटी एमेंडमेंट बिल, ट्रिपल आईटी बिल तथा कांस्टीट्यूशन शिड्यूल कास्ट आर्डर एमेंडमेंट बिल शामिल हैं। जबकि राज्यसभा में दिल्ली स्पेशल पुलिस बिल, लेबर लॉ एमेंडमेंट बिल तथा एप्रेंटिसेज एक्ट एमेंडमेंट बिल पारित किए गए। पहले दो बिल इसी सत्र में लोकसभा में पारित हुए। एप्रेंटिसेज बिल लोकसभा में पिछले ही सत्र में पारित हो गया था।

कालाधन, मनरेगा पर चर्चा
दोनों सदनों में कालाधन पर चर्चा कराई गई और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसका जवाब दिया। राज्यसभा में मनरेगा के नियमों में बदलाव को लेकर जताई जा रही आशंकाओं पर भी चर्चा हुई। राज्यसभा में पेश किए गए युवकों को अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण विधेयक और लोकसभा में हिमालय राज्यों की काउंसिल बनाने संबंधी विधेयक पर चर्चा की गई। दोनों सदनों में प्राइवेट मेंबर विधेयकों पर भी चर्चा हुई।

इराक में बंधक भारतीयों पर बयान
इराक में बंधक बनाए गए 39 भारतीयों के मामले तथा विश्व व्यापार संगठन (डलब्यूटीओ) की बातचीत के मुद्दे पर सरकार की तरफ से बयान दिया गया। इस पर कोई चर्चा तो नहीं हुई लेकिन सरकार से जवाब मांगने के लिए सदस्यों को बोलने का मौका दिया गया।

प्रश्नकाल चला
लोकसभा में एक दिन छोड़कर करीब-करीब सभी दिन प्रश्नकाल चला। जबकि राज्यसभा में दो दिन प्रश्नकाल चला। लोकसभा के मुकाबले राज्यसभा में विपक्ष ज्यादा हावी है। इसलिए यदि दोनों सदनों की तुलना करें तो लोकसभा में राज्यसभा के मुकाबले हंगामा कम हुआ।

अगले सप्ताह का एजेंडा
अगले सप्ताह दो अध्यादेशों के बदले लाए गए विधेयकों को दोनों सदनों में पारित किया जाना है। इनमें से एक टेक्सटाइल अंडरटेकिंग (नेशनलाइजेशन) लॉज एमेंडमेंट एंड वेलिडेशन बिल है और दूसरा, कोल माइंस एलोकेशन विधेयक है। दोनों में पहले अध्यादेश लाए जा चुके हैं। इन्हें दोनों सदनों में पारित किया जाना है। राज्यसभा में लोकसभा से हाल में पारित सेंट्रल यूनिवर्सिटी एमेंडमेंट बिल, कांस्ट्यूशन डिड्यूल आर्डर एमेंडमेंट बिल एवं ट्रिपल आईटी बिल को पारित करने की प्राथमिकता रहेगी। जबकि लोकसभा मर्चेंट शिपिंग एमेंडमेंट बिल, सप्लीमेंटरी ग्रांट्स एंड डिमांड बिल और स्कूल ऑफ आर्किटेक्ट एंड प्लानिंग बिल को ले सकती है।

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