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जहालत का जंगल

गाजियाबाद के एक संभ्रांत इलाके में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुई घटना अगर इतनी वीभत्स और अमानवीय नहीं होती, तो हास्यास्पद मानकर इस पर हंसा जा सकता था। तीन बेटों ने अपनी माँ को भूत भगाने के लिए पीट -पीटकर मार डाला और फिर उसे जिन्दा करने के लिए एक रिश्तेदार महिला की बलि चढ़ाने की कोशिश की। इससे यही पता चलता है कि ऐसी घटनाएं दूरदराज के इलाकों में या अशिक्षित लोगों के बीच ही नहीं होतीं, वे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के एक शहरी इलाके में पढ़े-लिखे परिवार में भी हो सकती हैं। या इस तरह का अंधविश्वास सिर्फ भारत में ही नहीं है, एक खबर यह भी है कि मास्को में कुछ लोगों ने पिछले नवंबर से अपने को एक गुफा में बंद कर रखा है, क्योंकि उनको विश्वास है कि दुनिया का अंत होने वाला है और तब वे ही बचे रहेंगे। यह मानव स्वभाव और संस्कृति का एक अंधेरा पक्ष है, जिसे यकीन है कि वह किसी किस्म के अतिमानवीय विचार या भाव से जुड़ा हुआ है, लेकिन वह दरअसल बुनियादी सामान्य समझ से भी दूर होता है। गाजियाबाद के इन भाइयों के बारे में ऊपरी तौर से यह नहीं कह सकते कि वे आधुनिकता से दूर हैं, उनमें से दो उच्चशिक्षित हैं, तीसरा इंजीनियरिंग का छात्र है, लेकिन तब भी अंधविश्वास का यह अंधेरा उन्होंने खुद अपने इर्दगिर्द बुन रखा था। अपने भौतिक अस्तित्व के पर जाने की मनुष्य की सहा इच्छा होती है, लेकिन अक्सर यह इच्छा टोने-टोटकों और तथाकथित तंत्र-मंत्र में अभिव्यक्त होती है। इसे बाजार में सहा उपलब्ध ज्योतिषी, तांत्रिक हवा देते हैं और सनसनीखे टीवी चैनल भी इन्हीं धारणाओं को पुष्ट करते हैं। इन भाइयों में से कोई एक इसी किस्म के तंत्र-मंत्र का अयास करता था और जाहिर है कि बाकी लोग भी इस पर इतना भरोसा करते थे कि वे अपनी माँ को तब तक पीटते रहे, जब तक वह मर न गई। यह उन अनेक घटनाओं की ही एक कड़ी है, जिनमें भूत भगाने या डायन होने के आरोप में अक्सर महिलाओं को मार डाला जाता है। इस घटना से यही पता चलता है कि अंधविश्वास का अंधेरा कितना घातक होता जा रहा है और कितनी दूर तक फैला हुआ है।

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  • Web Title: जहालत का जंगल