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विकास दर के मुकाबले महंगाई होगी प्राथमिकता

भारत के शेयर बाजार की गति भारतीय रिार्व बैंक की मंगलवार को घोषित होने वाली मौद्रिक नीति से तय होगी। अगले ही दिन अमेरिका के फेडरल रिार्व की भी नीति घोषित होने वाली है। संभवत: इसका असर कहीं अधिक पड़ेगा। जानकार लोगों का मानना है कि भारतीय रिार्व बैंक महंगाई पर काबू पाने के नाम पर कड़े कदम भी उठा सकता है। कैश रिार्व रशो में बढ़ोतरी का कदम वह पहले ही उठा चुका है। अब देखना होगा कि ब्याज दरों के मोर्चे पर रिार्व बैंक क्या पहल करता है। ऊंची ब्याज दरों के जरिये मुद्रा सप्लाई में कमी लाने की रणनीति पर वह पहले भी अमल करता रहा है। पिछले दो साल से अधिक समय से रिार्व बैंक सख्त मौद्रिक नीति लागू कर रहा है जिसके चलते ब्याज दरों में अच्छी खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बावजूद पिछले चार साल में औसत विकास दर 8.8 फीसदी रही है। लेकिन महंगाई के खिलाफ रिार्व बैंक की सख्त मौद्रिक नीति भी कामयाब होती नहीं दिख रही। यह बात अलग है कि रिार्व बैंक गर्वनर का कहना है कि खाद्य उत्पादों, सीमेंट व स्टील जसे उत्पादों की आपूर्ति और तेल की कीमतों में आई भारी तेजी महंगाई का मुख्य कारण है। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री नीति घोषित कर चुके हैं कि महंगाई पर अंकुश के लिए अगर विकास की बलि देनी पड़ी तो सरकार उससे परहेा नहीं करगी। ऐसे में रिार्व बैंक अगर मंगल को कोई सख्त कदमं उठाये तो आश्चर्य नहीं होगा। रिार्व बैंक महंगाई की सहनीय दर चार से पांच फीसदी मानता रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक यह 7.33 फीसदी पर चल रही है। वैसे, महंगाई पर काबू पाने के लिए जहां सरकार ने तमाम खाद्य उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क में भारी कटौती की है, वहीं अधिकांश के निर्यात पर रोक भी लगा दी है। इसके साथ ही स्टील और सीमेंट की कीमतों को लेकर उद्योग के साथ संवाद जारी है।

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