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ज्योतिकुमारन को लगा झटका

भारतीय ओलंपिक संघ के फैसले से हैरान के. ज्योतिकुमारन ने आईएचएफ को निरस्त करना अप्रजातांत्रिक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आईओए ने उन्हें कार्यकारिणी की बैठक में नहीं बुलाया। सोमवार को ज्योतिकुमारन ने यहां कहा कि मुझे आईओए द्वारा लिए गए इस अप्रजातांत्रिक फैसले से दुख और आश्चर्य हुआ है जिसमें मुझे और आईएचएफ अध्यक्ष केपीएस गिल को बर्खास्त किया गया है। एक टीवी चैनल के स्टिंग आपरशन के बाद आईएचएफ के सचिव पद से इस्तीफा दे चुके ज्योतिकुमारन ने कहा है कि बिना मेरा पक्ष सुने आईएचएफ को बर्खास्त कर देना गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि न तो मुझे बुलाया गया और न ही मुझे शो कॉज नोटिस भेजा गया। बैठक में जो भी विचार विमर्श हुआ उसमें मेरे पक्ष को कहीं रखा ही नहीं गया। जो कुछ भी उन्होंने निर्णय लिया है, आईओए का वह निर्णय गैरकानूनी है। इसमें नैसर्गिक न्याय के सार्वभौमिक पक्ष की अनदेखी की गई है। ज्योतिकुमारन ने आरोप लगाया है कि इस बैठक के लिए आईओए के किसी भी अधिकारी ने उनसे संपर्क नहीं किया। रिकार्ड में दर्ज हुआ है- मिस्टर सुरश कलमाडी ने कहा है कि मैं बुलाए जाने के बावजूद अपना पक्ष रखने के लिए मौजूद नहीं था। यह बात वास्तव में पूरी तरह से झूठ है। मुझे कार्यकारी समिति की बैठक के लिए नहीं बुलाया गया। आईओए के पास मेरा टेलीफोन नम्बर है, मोबाइल नम्बर है और ई मेल पता भी है। यहां तक कि कोई टेलीफोन कॉल तक नहीं की गई। ज्योतिकुमारन ने कहा कि उन्हें अपना पक्ष नहीं रखने दिया गया। मैंने आईएचएफ से तब तक के लिए त्यागपत्र दिया था जब तक मैं इस मामले में पाक साफ न करार दे दिया जाऊं। लेकिन मैं आईओए का कार्यकारी समिति का सदस्य था। मुझे आईओए ने लिखित रूप में भी अपना पक्ष रखने के लिए नहीं कहा।

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