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गेहूं को उठाने के लिए लेबर का टोटा

इस साल रिकॉर्ड उत्पादन और सरकारी समर्थन मूल्य बढ़ने के बावजूद भी गेहूं खरीद का मोहताज है। श्रमिकों की कमी के चलते लाखों टन गेहूं खुले में पड़ा हुआ है। एक तो बढ़ती महंगाई से सरकार पहले ही परशान है, दूसरी ओर श्रमिकों की कम संख्या से सरकार की फूड स्टॉक की स्कीम को भी पलीता लग रहा है। इस वर्ष देश में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस वर्ष रबी की फसल में गेहूं खरीद का लक्ष्य 76.8 मीट्रिक टन निर्धारित किया गया था। किसानों और व्यापारियों की मानें तो इस साल अकेले पंजाब और हरियाणा में ही पिछले वर्ष की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत ज्यादा गेहूं का उत्पादन हुआ है। गौरतलब है कि ये दोंनो राज्य देश के बड़े गेहूं उत्पादक राज्य हैं। नब्बे फीसदी से ज्यादा सरकारी गेहूं की खरीद इन्हीं दोंनो राज्यों से की जाती है। सरकार खरीदे गए अनाज को देश की गरीब जनसंख्या को सस्ते दामों पर मुहैया करवाती है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य सरकारों के आंकलन के मुताबिक छह अप्रैल तक 5.7मीट्रिक टन गेहूं का प्रबंध किया जा चुका था। लेकिन श्रमिकों की कमी के चलते गेहूं के बंडल भण्डारगृहों में रखे जाने की बाट जोह रहे हैं। नाम ना छापने की शर्त पर खन्ना के एफसीआई के एक अधिकारी ने बताया कि बारिश या अन्य किसी दुर्घटना की स्थिति में फसल को नुकसान हो सकता है। ये स्थिति लेबर की कमी से उत्पन्न हुई है। खन्ना जिले के कमीशन एजेंट और खन्ना चावल विक्रेता संघ के अध्यक्ष लखबीर सिंह ने बताया कि अकेले खन्ना में अब तक 0.7 लाख टन गेहूं आ चुका है जो पिछले वर्ष के कुल उत्पादन के बराबर है। अभी इसका 25 फीसदी गेहूं और आने की उम्मीद है। सरकार को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 1000 रु. प्रति क्िवंटल कर दिया गया है जिससे किसान काफी उत्साहित हैं। पिछले साल यह कीमत 850 रु. प्रति क्िवंटल थी। लेकिन श्रमिकों की कमी इस समय एक गंभीर समस्या है। कुछ ऐसे ही हालात हरियाणा में भी हैं। करनाल की अनाज मंडी में खाद्यान की भरमार है लेकिन उसे उठाने वाला कोई नहीं। मंडी में काम करने वाले झारखंड निवासी श्रमिक अहमद मुनार ने बताया कि उनके गांव के अधिकांश श्रमिक राष्ट्रीय ग्रामीण रोगार गारंटी स्कीम (एनआरईजीएस) के अन्तर्गत काम कर रहे हैं और कोई यहां नहीं आना चाहता। इन राज्यों में काम करने वाले अधिकांश मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड राज्यों से आते हैं।

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  • Web Title: गेहूं को उठाने के लिए लेबर का टोटा