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कॉलेज के लिए फंड पर आज मिलेगी मंजूरी

सीसीएल के इांीनियरिंग कॉलेज खोलने का काम शीघ्र शुरू होने की संभावना है। कंपनी बोर्ड की 2अप्रैल को होने वाली बैठक में उसके लिए फंड रिलीज करने को मंजूरी मिलने की संभावना है। कंपनी के गांधीनगर कॉलोनी में डीएवी ग्रुप के साथ मिलकर इसे खोलने की योजना है। करीब 35 करोड़ रुपये की पूरी योजना है। पैसा तीन चरणों में ग्रुप को दिया जायेगा। इसका नाम सीसीएल डीएवी इंस्टीटय़ूट ऑफ इांीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी रखने की योजना है। इसमें सीसीएलकर्मियों के संतानों के लिए कुछ सीट रिार्व रहेगा। उन्हें शुल्क में भी छूट दी जायेगी। इसके संचालन के लिए कमेटी गठित की जायेगी। कॉलेज बनाने के प्रस्ताव को बोर्ड ने पहले ही मंजूरी दे दी है। इस बैठक में भाग लेने के लिए डीटी आरके साहा और डीपी टीके चांद दिल्ली चले गये हैं। बताया जाता है कि मंगलवार को दिल्ली में ही सीआइएल बोर्ड की बैठक आहूत की गयी है। इसमें भी कई नीतिगत निर्णय लिये जाने की संभावना है। कामगारों को बधाई दी द झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, महासचिव सनत मुखर्जी सहित अन्य ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए कामगारों को बधाई दी है। इसमें साथ देने वाले अन्य श्रमिक संगठन के सदस्यों का भी आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह सांकेतिक हड़ताल थी। कोल इंडिया और केंद्रीय श्रमिक संगठन के नेता अपनी कारगुजारी से बाज नहीं आये, तो परिणाम और गंभीर होगा। कामगार अब जाग चुके हैं। हड़ताल को विफल बताया इंटक के क्षेत्रीय सचिव सव्रेश प्रसाद ने सीएमपीडीआइ में हड़ताल को विफल करार दिया। कहा कि 1ामगारों में 1353 उपस्थित थे। पहले से ही 187 लोग टूर पर थे। इससे स्पष्ट होता है कि जिन मांगों को लेकर इसका आह्वान किया गया था, उसे कामगारों ने नकार दिया। गेट मीटिंग आज द झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन गेट मीटिंग 2अप्रैल को एक बजे से सीसीएल मुख्यालय के समक्ष होगी। यह जानकारी यूनियन के नवीन कुमार झा ने दी। सीसीएल में हड़ताल असरदारसंवाददाता रांची द झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन द्वारा 28 अप्रैल को कोल इंडिया में आहूत हड़ताल सीसीएल में असरदार रही। ओवरऑल 65 फीसदी लोग इसमें शामिल हुए। कंपनी मुख्यालय में उपस्थिति नगण्य रही। यहां स्कूल बस तक नहीं निकली। आकस्मिक सेवाओं में काला बिल्ला लगाकर कामगारों ने डय़ूटी की। सीएमपीडीआइ और बीसीसीएल में इसका आंशिक पड़ा। यूनियन कामगारों को बेसिक पर मात्र 15 फीसदी अंतरिम राहत देने एवं इस पर श्रमिक संगठन के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर का विरोध कर रही है। यूनियन के सदस्य सुबह पांच बजे ही कंपनी मुख्यालय गेट पर आ गये थे। सभी कामगारों से हड़ताल में शामिल नहीं होने का आग्रह भर कर रहे थे। दरभंगा हाउस के मेडिकल, एचआरडी और पीआर में कोई नहीं आया। वित्त, प्रेस सहित अन्य विभागों में एक-दो की संख्या में कामगार आये थे। कंपनी के माइंस रसक्यू स्टेशनों में शत प्रतिशत उपस्थिति रही। उरीमारी में यूनियन नेताओं से झड़प होने की सूचना भी है। हाारीबाग, रारप्पा, बीएंडके, नार्थ कर्णपुरा, पिपरवार, अरगड्डा, रारप्पा वाशरी में इसका व्यापक असर पड़ा। यहां उत्पादन के साथ ढुलाई भी प्रभावित हुई। प्रबंधन के मुताबिक प्रथम पाली में 1000 कामगार उपस्थित एवं 10000 हड़ताल पर रहे। बड़ी संख्या में सीक लीव भी उन्होंने ले रखा था। सीएमपीडीआइ मुख्यालय में 128 लोग हड़ताल पर रहे। करीब 321 लोग सीक लीव पर थे। यहां से मात्र एक स्कूल बस निकली। कई ने काम करने के बाद भी हाजिरी नहीं बनायी। कोल इंडिया मुख्यालय में भी असर नहीं पड़ा। संगठन के महासचिव सनत मुखर्जी के अनुसार इसीएल की राजमहल सहित इसीएल की चार खदानें पूरी तरह बंद रही। डब्ल्यूसीएल में हड़ताल का असर रहा। बीसीसीएल और एसइसीएल में आंशिक असर की बात कही। हड़ताल बेअसर : डीपी सीसीएल के डीपी टीके चांद ने कहा कि हड़ताल से मुख्यालय में कोई परशानी नहीं हुई। काम आम दिन की तरह ही हुआ। राहरा, चरही, केदला, केडी ओसीपी आदि में सामान्य कामकाज हुआ। अप्रैल में प्रोडक्शन की अधिक हानि नहीं होती है। इस माह अपेक्षाकृत कम उत्पादन होता ही है। उनके मुताबिक कुाू, एनके, पिपरवार, अरगड्डा, बरका-सयाल में उत्पादन और ढुलाई का काम करीब 50 फीसदी प्रभावित हुआ है।

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