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पीएमआरवाइ की उपलब्धि निराशाजनक

झारखंड में प्रधानमंत्री रोगार योजना (पीएमआरवाइ) की उपलब्धि अपेक्षाकृत कम रही। वित्तीय वर्ष 2007-08 में 7,700 शिक्षित बेरोगारों को स्वरोगार के लिए ऋण देने का लक्ष्य रखा गया था। इसको लेकर राज्यभर में 16,280 बेरोगारों ने आवेदन दिया। इनमें से जिला उद्योग केंद्रों ने 12,आवेदन स्वीकृत कर बैंकों को ऋण देने के लिए भेजा। लेकिन बैंकों का रवैया इस योजना को लेकर काफी उदासीन रहा। वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने मार्च तक जिला उद्योग केंद्रों से प्राप्त आवेदन के विरुद्ध मात्र 5,275 बेरोगारों को ही ऋण मुहैया कराया जा सका। यह कुल प्राप्त आवेदनों का 68.51 प्रतिशत ही है। बैंकों ने 7,347 आवेदन भुगतान के लिए स्वीकृत किये गये थे। यह उपलब्धि राज्य के 22 जिलों की है। केंद्र सरकार ने झारखंड में इस महत्वपूर्ण योजना की अपेक्षाकृत कम उपलब्धि पर असंतोष व्यक्त जताया है। योजना के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भुगतान की अवधि दो महीने और बढ़ा दी गयी है। चयनित लाभुकों को 31 मई तक ऋण देने का निर्देश दिया गया है। उद्योग निदेशालय ने केंद्रीय दिशा-निर्देश के आलोक में जिला उद्योग केंद्रों, राष्ट्रीयकृत बैंकों और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को चिट्ठी भेजी है। उद्योग निदेशालय का मानना है कि भुगतान की अवधि बढ़ाये जाने से लक्ष्य की प्राप्ति हो जायेगी। इधर, इस संदर्भ में बेरोगारों का कहना है कि जिला उद्योग केंद्र तो आवेदन स्वीकृत कर बैंकों को भेज देता है, लेकिन बैंकों का रवैया ठीक नहीं होने के कारण उन्हें काफी परशान होना पड़ता है।

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