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सरकारी आवासों परच अनधिकृत कब्जे हटेंगे

प्रदेश सरकार ने राज्य सम्पत्ति विभाग के अधीन सरकारी भवनों और आवासों पर काबिज अनधिकृत व्यक्ितयों और संस्थाओं के कब्जों को जबरन हटाने सम्बन्धी चर्चित विधेयक को राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। विधान सभा से पारित इस विधेयक को विधान परिषद ने दूसरी बार भी नियत अवधि में जब मंजूरी नहीं दी तब विधानसभा सचिवालय ने इस विधेयक को विधानमण्डल के दोनों सदनों से पारित मानकर राज्य सरकार के पास भेज दिया था।ड्ढr यदि राज्यपाल ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी तब राज्य सम्पत्ति विभाग को अधिकार मिल जाएगा कि वह अपने भवनों और आवासों पर वर्षो से काबिज गैर सरकारी संगठनों, ट्रस्टों, राजनैतिक दल, पूर्व मंत्री, सांसद आदि व्यक्ितयों को बेदखल कर सकती है, जो पात्रता की श्रेणी में नहीं आते हैं। ऐसे अपात्र संस्थाओं और व्यक्ितयों की संख्या करीब 75 है। अभी तक अपात्र लोगों को बेदखल करने के लिए विभाग को लम्बी कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। पूराने कानून में संशोधन कर उसकी पेचदगियों को दूर कर दिया गया है। राज्य सम्पत्ति विभाग केवल एक बार अनधिकृत कब्जेदार को नोटिस देगा फिर उसे जबरन निकाल बाहर करगा।ड्ढr ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक भू-गृहादि (अप्राधिकृत अध्यासियों की बेदखली) (संशोधन) विधेयक 2007‘ को विधानसभा ने पहली बार गत वर्ष चार दिसम्बर को पारित किया था। विधान परिषद में समाजवादी पार्टी आदि अन्य विपक्षी दलों के कड़े विरोध के कारण वहाँ यह पारित नहीं हुआ। निर्धारित तीन महीने की अवधि बीत जाने पर विधानसभा में बीते 10 मार्च को इस विधेयक को दोबारा पारित कराया गया। उसे विधान परिषद को पुन: भेजा गया। दूसरी बार भेजे जाने के बाद भी परिषद ने एक महीने की अवधि में विधेयक नहीं पारित किया तब नियमानुसार विधानसभाध्यक्ष ने संवैधानिक और विधानसभा की प्रक्रिया नियमावली के प्रावधानों के तहत इस विधेयक को विधानमण्डल के दोनों सदनों से पारित मान लिया।ं

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