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पुलिस की नजर में तो नक्सली है गुलाबी गैंग

महिला अधिकारों व अन्य मसलों पर बाँदा में काम कर रहा महिलाओं का संगठन गुलाबी गैंग नक्सल गतिविधियों को लेकर पुलिस के निशाने पर है। बाँदा के एसपी को डीाीपी मुख्यालय से निर्देश दिए गए हैं कि वे यह पता करं कि इस संगठन का प्रोफाइल क्या है। संगठन चलाने पर हो रहे खर्च का स्रोत क्या है और इनका असली उद्देश्य क्या है। इस संगठन के अलावा बिहार, झारखंड व छत्तीसगढ़ जसे राज्यों में अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय एक वामपंथी संगठन और अंतरप्रांतीय सीमा पर काम कर रहे गैर सरकारी सामाजिक संगठनों के बार में भी खुफिया जानकारियाँ जुटाई जा रही हैं।ड्ढr डीाीपी विक्रम सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिहार, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश जसी स्थितियाँ न पैदा हों इस वास्ते यूपी पुलिस .एक हाथ में झंडा और दूसर हाथ में डंडा.की नीति अपना रही है। पहले तो इन संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत और उन्हें समझा-बुझाकर सही रास्ते पर लाने की कोशिश होगी। अगर वे फिर भी नहीं माने तो उन पर सख्ती होगी। उन्होंने बाँदा के गुलाबी गैंग का जिक्र करते हुए बताया कि बाँदा के एसपी को सख्त लहो में कहा गया है कि वे इस संगठन को एक सामान्य सामाजिक संगठन न मानें।ड्ढr गरीबों के हक के लिए लड़ रही हूँ:संपत पालड्ढr बाँदा। गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल गरीबों के हक के लिए कई बार अपनी जान दाँव पर लगा चुकी है। 2006 में तो उसने गुठिल्ला पुरवा की सुशीला के पति को फर्ाी मामले से बचाने के लिए अतर्रा थाने को घेर लिया था। दरोगा झपटा तो गैंग की महिलाओं ने उसे रस्सियों से बाँध लिया। पुलिस को हाथ खड़े करने पड़े। गुलाबी गैंग में करीब 30 हाार महिलाएँ हैं। गरीब परिवार की संपत पाल कहती हैं ‘हमार पास कहीं जाने के लिए किराया तक नहीं होता। अत्याचारियों से टकराने वाला कोई नहीं है। भूखे-प्यासे रहकर हम गरीबों की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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