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रत होती जा रही है राप्ती

नेपाल के धौलागिरि पहाड़ से निकल कर बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज और गोरखपुर होती हुई देवरिया तक 250 किलोमीटर का सफर करने वाली राप्ती को जिन्होंने दस-बीस साल पहले देखा है, आज उसकी दशा देख कर चिंतित हो जाते हैं। उनके मुख से निकल पड़ता है यह तो वह राप्ती नहीं! यह नदी एक पतले नाले के रूप में नजर आती है। यहाँ घुटने भर पानी है।ड्ढr आखिर क्यों हो रहा है ऐसा? नेपाल भारतीय सीमा से सटे नेपाल के बाँके जिले के अगइया ग्राम में राप्ती नदी पर सिक्टा बैराज का निर्माण कर रहा है। चीन की सिने हाइड्रो कान्सट्रक्शन कंपनी के दक्ष इांीनियर इस बैराज के निर्माण में लगे हैं। इसके बाद भारतीय क्षेत्र में बह कर आने वाली राप्ती नदी के जल प्रवाह का रुख नेपाली क्षेत्र में मोड़ दिया जाएगा। नतीजतन राप्ती नदी भारतीय क्षेत्र में सूख जाएगी। राप्ती नदी में जल का प्रवाह रुक जाने से भारतीय क्षेत्र में भीषण जल संकट उत्पन्न हो जाएगा। दूसरा कारण बताते हैं पर्यावरणविद् डॉ. शीराज वजीह। उनके अनुसार ग्लोबल वार्मिग के असर से उद्गम पर पानी कम हुआ है। नदियाँ अपने साथ काफी गाद ला रही हैं। मिट्टी का क्षरण न रोके जाने से इस के कारण नदियाँ छिछली हो गई हैं। गहरा कर इनमें पानी तो बढ़ाया जा सकता है मगर इस पर काफी धन खर्च होगा, जो संभव नहीं। फिर भी मिट्टी का क्षरण तो रोका ही जा सकता है। 1में राप्ती और सरयू ने सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूामि में घुटने से कमर तक रत उगल दी है। प्रदूषण भी इतना बढ़ गया है कि गोरखपुर में राजघाट पर इसका पूरा पानी काला हो चुका है।ं

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