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खानाबदोश लोगों के हालात बदलेंगे

रस्सियों पर घूम-घूम कर करतब दिखाने वाले और बंदर-भालू का नाच दिखाकर जीवन बसर करने वाले खानाबदोश लोगों के हालात बदलेंगे। राज्य सरकार न केवल उन्हें बसाने की व्यवस्था करगी बल्कि उनकी शिक्षा-दीक्षा और रोी-रोटी के भी इंतजाम किए जाएंगे। यह निर्णय राष्ट्रीय विमुक्त घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू जनजाति आयोग के साथ हुई बैठक में राज्य सरकार ने लिया। आयोग भारत सरकार की सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत काम करता है। इसकी टीम बिहार के दौर पर है और सोमवार को उसने राज्य के अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण मंत्री जीतनराम मांझी के साथ बैठक की। आयोग की टीम मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलेगी।ड्ढr ड्ढr टीम में आयोग के अध्यक्ष बालकृष्ण रनके, सचिव लक्ष्मी चंद और सदस्य लक्ष्मण भाई के. पटनी शामिल हैं। आयोग देश भर में घूमकर घुमंतू जनजातियों के बार में अध्ययन कर रहा है। बैठक की जानकारी देते हुए मंत्री श्री मांझी ने बताया कि बिहार में घुमंतू जनजातियों में मुख्यत: बंजारा और आदिम जनजाति समूह के लोग हैं। बिहार में बंजारों की आबादी 2328 और आदिम जनजाति समूह की आबादी है। एक जगह नहीं रहने के कारण इनके बार में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है। श्री मांझी ने बताया कि आयोग के साथ बैठक में तय हुआ कि इन जनजातियों का पहले सव्रे कराया जाएगा। इसके बाद उनके रहने के लिए जमीन की व्यवस्था की जाए और उन्हें शिक्षा के साथ रोी-रोगार दिया जाए। ये लोग नाचने-गाने, करतब दिखाने और बंदर-भालू का तमाशा दिखाने के व्यवसाय में लगे हैं। इन्हें इन्हीं विधाओं का आधुनिक व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। जो लोग घूम-घूम कर जड़ी-बूटी आदि बेचा करते हैं उन्हें भी प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी।

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