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चुनाव डय़ूटी लगाने का मामला गरमाया

बैंक कर्मचारियों को लोकसभा चुनाव में डय़ूटी लगाने का मामला गरमाता रहा है। चुनाव के लिए गठित स्थापना कोषांग के आंकड़े के मुताबिक जिले के 1158 बैंककर्मियों को ही चुनावी डय़ूटी में लगाया गया है, जबकि जिले में इनकी संख्या करीब 6200 है। कर्मचारियों की कमी की आड़ में राजधानी में बैंकों का कामकाज ठप रखने को स्थापना कोषांग ने गलत बताया है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने बताया है कि जिले के बैंकों से 1745 कर्मचारियों और पदाधिकारियों के नाम चुनाव डय़ूटी के लिए आए थे। इनमें से स्थापना कोषांग ने 1358 लोगों को चुनाव कार्यो में लगाया है। इनमें से भी करीब दो सौ कर्मचारियों को चुनाव डय़ूटी से मुक्त करने के आवेदन पत्र पर अनुशंसा की जा चुकी है। 45 लोगों को मजिस्ट्रेट की डय़ूटी दी गई थी, जिन्हें भी मुक्त करने की अनुशंसा की गई। डीएम ने बताया कि 1158 बैंककर्मियों को चुनाव डय़ूटी में लगाया गया है। इन लोगों को माइक्रो आब्जर्वर और फोटोग्राफी इंचार्ज की जिम्मेदारी दी गई है। इनको चुनाव कार्य के लिए मात्र दो घंटे की ब्रीफिंग दी गई है। उन्होंने बताया कि पूर जिले में कुल 4700 कर्मचारियों को पीठासीन पदाधिकारी की डय़ूटी दी गई है, जिसमें 156 बैंककर्मी हैं। इसमें से 45 लोगों को चुनाव डय़ूटी से वापस लेने की अनुशंसा की गई है। डीएम ने बताया कि ऐसे में कर्मचारियों का टोटा बताकर ब्रांचों का कामकाज ठप करना बिल्कुल गलत है।ड्ढr ड्ढr दूसरी ओर, एसबीआई कर्मचारी संघ के वरीय नेता जेएन सिंह ने बताया कि बैंक पदाधिकारियों को माइक्रो आब्जर्वर के रूप में लगाया गया है, लेकिन अधिकतर कर्मचारियों को पीठासीन पदाधिकारी बनाया गया है। इसकी ट्रेनिंग तीन दिनों के लिए होती है। इसके कारण कई बैंकों का कारोबार प्रभावित रहा। बिहार प्रोविंशियल बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन के सहायक सचिव संजय तिवारी बताया कि बोरिंग रोड के कारपोरिशन बैंक, एक्ाीबिशन रोड स्थित यूको बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक कुछ ऐसी शाखाएं है, जहां कामकाज प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि तकनीकी कारणों से कम स्टॉफ होने पर बैंक की शाखाएं काम नहीं कर सकती।ं

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