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आंखों से चश्मा हटा दें ऐसी कुछ मिनट की योग क्रियाएं

आंखों से चश्मा हटा दें ऐसी कुछ मिनट की योग क्रियाएं

आंखें हमारी महत्वपूर्ण इंद्रियों में से एक हैं, इसीलिए इन्हें सुरक्षित रखना बहुत आवश्यक है। किन्तु यांत्रिक जीवनशैली ने बड़े ही नहीं, बच्चों की आंखों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। कुछ यौगिक क्रियाएं अपना कर हम इन्हें सुरक्षित रख सकते हैं। बता रहे हैं योगाचार्य कौशल कुमार

योग के नियमित अभ्यास एवं यौगिक जीवनशैली अपना कर आंखों की अधिकतर समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सकता है। योग की कुछ क्रियाएं अपना कर हम न केवल आंखों को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि आंखों पर लगे चश्मे को भी हटा सकते हैं।

क्रिया नम्बर-1
पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन या कुर्सी पर बैठ कर या सीधे खड़े होकर दायें हाथ को सामने की ओर सीधा फैला दें। इस हाथ की मुट्ठी बंद कर अंगूठे को ऊपर की ओर सीधा तान दें। अब दोनों आंखों को सामने के अंगूठे पर केन्द्रित करें। पलकों को बिना झपकाए आरामदायक अवधि तक अंगूठे पर केन्द्रित रखते हुए वापस पूर्व स्थिति में आएं। इस क्रिया का 2-3 बार अभ्यास करें।

क्रिया नम्बर-2
ऊपर दिए आसनों में से किसी एक में बैठ कर अपने दोनों हाथों को कंधों की ऊंचाई तक अगल-बगल उठाएं। चेहरे को सामने की ओर स्थिर रखते हुए दोनों आंखों की पुतलियों को दाएं हाथ के अंगूठे की तरफ ले जाएं। इसके बाद दोनों आंखों की पुतलियों को बाएं हाथ के अंगूठे पर केन्द्रित करें। इसी प्रकार उन्हें बारी-बारी से दोनों अंगूठों पर घुमाएं। यह क्रिया 5-7 बार करें।

क्रिया नम्बर-3
उपरोक्त में से किसी एक आसन में स्थिरतापूर्वक बैठ जाएं। चेहरे एवं सिर को पूर्णतया स्थिर रखते हुए आंख की पुतलियों को अधिकतम ऊपर ले जाएं। आंखों की पलकों को बिना झपकाए ऊपर की ओर देखें। पलकों को तब तक न झपकाएं, जब तक आंखों में जलन महसूस न होने लगे या उनसे पानी न निकलने लगे। यही क्रिया आंख की पुतलियों को दाएं-बाएं तथा नीचे की ओर रख कर भी करें और अपनी सुविधानुसार इसे तीन-चार बार करें।

क्रिया नम्बर-4
उपर्युक्त वर्णित किसी भी आसन में बैठ कर दोनों हाथों की हथेलियों को अच्छी तरह से आपस में इतना रगड़ें कि हाथों में पर्याप्त गर्मी आ जाये। इसके बाद हथेलियों को बन्द आंखों पर कुछ देर तक रखें। इस समय बन्द आंखों से काले आसमान पर दृष्टि स्थिर रखें। कुछ देर बाद हथेलियों को आंखों से हटा कर नीचे रखें।

आसनों का अभ्यास
उपर्युक्त क्रियाओं के अभ्यास के पश्चात सर्वागासन, शीर्षासन तथा हलासन के साथ इसके विपरीत आसनों का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। इनसे आंखों में खून का अधिकतम संचार होता है, जिससे आंखों के अनेक रोग दूर होते हैं। यह बच्चों एवं युवाओं के लिए अतिप्रभावकारी सिद्ध होते हैं।

सर्वागासन की अभ्यास विधि
पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों पैरों को धीरे-धीरे जमीन से ऊपर उठा कर 90 डिग्री तक लाएं। इसके बाद नितम्ब तथा कमर को भी जमीन से ऊपर उठा कर धड़ तथा पैर को गर्दन से 90 डिग्री पर ले आएं। हाथों को कमर पर रख कर सहारा दें। इस स्थिति में आरामदायक समय तक रुकें। इसके बाद धीरे-धीरे पूर्व स्थिति में आएं। यह अभ्यास प्रारम्भ में 5 से 10 सेकेंड तक करें और फिर धीरे-धीरे बढ़ा कर 4 से 5 मिनट तक करें।

सावधानी
उच्च रक्तचाप, निम्न रक्त चाप, हृदय रोग, सर्वाइकल या अन्य किसी गंभीर रोग से पीडित व्यक्ति इसका अभ्यास न करें।

आहार कैसा हो
दूध, गाजर, पपीता, आंवला, आम, कच्चा नारियल, घी, मक्खन, अंजीर तथा गूलर का पर्याप्त सेवन करें। गाजर का एक कप और पालक के दो कप रस मिला कर दिन में 2-3 बार पिएं। हरी सब्जियां जैसे पालक, पत्ता गोभी, लौकी, चौलाई तथा मेथी का पर्याप्त सेवन करें। गाय का दूध पीने से आंखों की ज्योति बढ़ती है।

इन्हें भी आजमाएं
सुबह-शाम शवासन या योग निद्रा करें।
मुंह में पानी भर कर आंखों पर ताजे पानी के छींटें मारें।
बहुत कम या बहुत तेज रोशनी में न पढ़ें। लेट कर भी न पढ़ें और न ही लेट कर टीवी देखें।
अधिक तनाव एवं कब्ज से बचें।

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