DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फ्रेक्चर हो सकता है जानलेवा

आजकल बाइक से गिरने, फर्श पर स्लिप होने और खानपान में गड़बड़ी जैसे विभिन्न कारणों से हड्डी टूटने की घटनाएं अधिक हो रही हैं। क्या है यह समस्या और इससे कैसे बचें, बता रहे हैं अजय शर्मा

हाथ की कलाई, पैर और कूल्हे में फ्रेक्चर दुपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा देखने में आता है। इसमें हिप बोन यानी कूल्हे का फ्रेक्चर सबसे ज्यादा खतरनाक है, जो ऑर्थोपेडिक डॉंक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाला तथ्य यह भी है कि शहरों में रह रहे युवाओं की हड्डियां कैल्शियम की कमी के कारण और ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं की हड्डियां प्रोटीन की कमी के कारण कमजोर हो रही हैं।

सड़क हादसों में घायल होने वाले सिर पर चोट लगने से भले ही बच जाएं, लेकिन शरीर के बाकी हिस्सों की चोटों से नहीं बच सकते, जो काफी गंभीर हो सकती हैं। ये चोटें व्यक्ति को अपाहिज तक बना सकती हैं। इसमें सबसे ज्यादा खतरनाक हिप बोन (कूल्हे की हड्डी) और बैक बोन (रीढ़ की हड्डी) की चोट होती है। एम्स के ट्रॉमा सेंटर में पहुंचने वाले घायल 20 फीसदी युवा हैं, जो 20 से 35 साल के हैं।

ऑर्थोपेडिक डॉंक्टर के. के. मित्तल के मुताबिक सडम्क हादसों के घायलों में ऑर्थोपेडिक इंजरी के मरीजों में करीब 40 फीसदी हाथ की कलाई और हिप बोन फ्रेक्चर से पीडित होते हैं। ये दोनों फ्रेक्चर बेहद गंभीर किस्म के होते हैं, जो किसी भी मरीज को बाकी उम्र के लिए काम करने और चलने-फिरने से लाचार कर सकते हैं।

क्यों होते हैं ऐसे फ्रेक्चर
सड़क हादसों में तेज रफ्तार दोपहिया वाहन से गिरने पर चालक के शरीर का पूरा भार हाथ की कलाई या हिप बोन पर ही आता है। इसके बाद सिर नीचे लगता है, इसलिए हाथ, बाजू या पैर टूटने के अलावा गंभीर चोट कूल्हे की हड्डी या सिर में भी लगती है। हेलमेट सिर तो बचा लेता है, लेकिन हिप बोन टूट जाती है।

क्यों है गंभीर हिप बोन फ्रेक्चर
हिप बोन फ्रेक्चर में सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि कूल्हे की हड्डी का निचला और पतला हिस्सा बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता है, जिसे बैग ऑफ बोन्स के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे मरीजों को फिर से पैरों पर खड़े होने लायक बनाना नामुमकिन-सा हो जाता है, क्योंकि इसी हिस्से में टांग की हड्डी कूल्हे के साथ जुड़ी होती है।

बचाव और उपचार 
अगर आपका दिनभर बैठने का काम है तो सुबह या शाम घूमने अवश्य जाएं। किसी शारीरिक गतिविधि में शामिल रहें जैसे जॉगिंग, स्विमिंग, योग, बैडमिंटन आदि। खाने की खराब आदतों को छोड़ें। कोल्ड ड्रिंक की जगह दूध पिएं। स्वस्थ व संतुलित डाइट लें, जिसमें विटामिन डी भी हो, ताकि कैल्शियम हजम करने में मदद मिल सके। अगर आप अधिक कैल्शियम लेते हैं और पर्याप्त पानी नहीं पीते तो पेशाब में कैल्शियम जमा हो जाता है और पथरी बनने लगती है। साथ ही दिन में धूप जरूर लें।

अगर आप स्वस्थ हड्डियों के मालिक बनना चाहते हैं तो जरूरी है कि आपके शरीर में पर्याप्त कैल्शियम हो, क्योंकि जब शरीर में पर्याप्त कैल्शियम होता है तो वह चेहरे पर अंदरूनी मजबूती के तौर पर झलकता है।

शरीर में लगातार पर्याप्त कैल्शियम का बनते रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि शरीर त्वचा, नाखूनों, बालों और मल के जरिए रोज कैल्शियम गंवाता है। इस खोए हुए कैल्शियम की पूर्ति का ध्यान रखना आवश्यक है। अगर आप इसका ध्यान नहीं रखेंगे तो आपका शरीर आपकी हड्डियों से कैल्शियम लेने लगेगा। परिणामस्वरूप आप बाहर से भले कमजोर न दिखें, लेकिन अंदर ही अंदर आपकी हड्डियां खोखली हो जाएंगी और शरीर कमजोर।

जीवनभर आपकी हड्डियों की सेहत कैसी रहेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका किशोरावस्था में कितना ख्याल रखा गया था। शरीर कैल्शियम को सही हजम कर सके, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी भी मिलना चाहिए, जो सूरज की रोशनी से हासिल होता है। कैल्शियम सप्लीमेंट लेने से पहले डॉंक्टर से सलाह अवश्य ले लें।

फ्रेक्चर के बाद जरूरी है फिजियोथैरेपी
प्लास्टर लगने के बाद हड्डी जुड़ने की प्रक्रिया शुरू होती है। हड्डी टूटने के स्थान पर कैल्शियम का जमाव होना जरूरी है और इसी तरह हड्डियों के 2 टूटे सिरे आपस में जुड़ते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में हड्डियों के आसपास मौजूद मांसपेशियां प्लास्टर के भीतर कार्यहीन अवस्था में बिना संकुचन के शिथिल पड़ी रहती हैं। फिजियोथेरेपिस्ट अपूर्वा के मुताबिक प्लास्टर के कटते ही रोगी अपनी पुरानी शक्ति को दोबारा हासिल करना चाहता है, जिसमें फिजियोथेरेपी कारगर साबित होती है। मांसपेशियों की शक्तिहीन स्थिति को ठीक करना और टूटे हुए अंग की संकुचित हो चुकी गति-चाल को पूर्व कार्य अवस्था में लाना फिजियोथेरेपी का काम है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:फ्रेक्चर हो सकता है जानलेवा