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दक्षेस देशों के बीच रेलवे, मोटर और ऊर्जा पर होंगे समझौते

दक्षेस देशों के बीच रेलवे, मोटर और ऊर्जा पर होंगे समझौते

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को विदेश यात्रा से लौटकर कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। इसमें दक्षिण एशियाई देशों के बीच रेलवे और मोटर वाहनों के जरिए यात्री परिवहन और मालवहन आरंभ करने संबंधी दो समझौते शामिल हैं। इसके अलावा दक्षेस देशों के बीच क्षेत्रीय बिजली ग्रिड कायम करने के लिए सदस्य देशों के साथ समझौते की रूपरेखा को भी बैठक में मंजूरी दी गई।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (दक्षेस) के सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय रेलवे समझौते और मोटरवाहन समझौते के मसौदे यातायात पर अंतर-सरकारी समूह के विशेषज्ञ समूहों ने तैयार किया है। इन्हें सितंबर में आयोग ने अंतिम मंजूरी दी थी। इन समझौते पर 26-27 नवंबर 2014 को काठमांडू में दक्षेस शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षर किए जाएंगे।

इसके जरिए दक्षेस देशों के बीच रेलवे संपर्क स्थापित किया जाकेगा। दक्षेस मोटर वाहन समझौते से दक्षेस के सदस्य देश एकदूसरे के मालवाहक और यात्री वाहनों को अपने यहां आने की अनुमति देंगे। इससे क्षेत्र के लोगों को आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन, सांस्कृतिक संपर्क आदि का रास्ता एवं सर्वसुलभ साधन मिल सकेगा।

दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैबिनेट बैठक के बाद दक्षेस देशों के बीच क्षेत्रीय बिजली ग्रिड संबंधी समझौते को मंजूरी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस समझौते से दक्षेस देशों के बीच बिजली क्षेत्र में सहयोग बढम् सकेगा। इससे समूचे दक्षेस क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। इससे क्षेत्रीय बिजली ग्रिड के समन्वित परिचालन को सुविधा मिलेगी।

नेपाल से बढ़ेगा पर्यटन और बिजली सहयोग
पर्यटन के क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए भारत और नेपाल के बीच होने वाले करार को भी कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई। इस करार पर प्रधानमंत्री की नेपाल यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस पर हस्ताक्षर होने से नेपाल से भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढमेतरी होगी और इससे देश में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के अवसर बढेंम्गे।

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना शुरू करने की मंजूरी दे दी। योजना के दो हिस्से होंगे, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि खपत और अन्य इस्तेमाल के अलग-अलग फीडर बनाए जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उप पारेषण और वितरण ढांचे को मजबूत किया जाएगा। इसमें उपभोक्ताओं, ट्रांसफार्मर तथा फीडर के लिए मीटर की व्यवस्था शामिल होगी। दोनों हिस्सों के लिए 43,033 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जाएगा। मंत्रिमंडल ने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के बचे हुए कार्य को इस योजना में समाहित करने को भी मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा और नागालैंड में अंतरराज्यीय पारेषण और वितरण सुविधा को सुदृढम् करने के लिए 5111.33 करोड़ रुपए की योजना को भी स्वीकृति दी गई। इस योजना में विश्व बैंक और केंद्र सरकार की 50-50 प्रतिशत भागीदारी  होगी।

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