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दूरस्थ शिक्षा के नियमन के लिए केंद्र ने किया फैसला

दूरस्थ शिक्षा के नियमन के लिए केंद्र ने किया फैसला

केंद्र सरकार ने पहली बार दूरस्थ शिक्षा को रेगुलेट करने के लिए कानून बनाने का फैसला किया है। दूरस्थ शिक्षा को रेगुलेट करने के लिए यूजीसी की तर्ज पर एक नई एजेंसी बनेगी। साथ ही दूर शिक्षा प्रदान करने वाली संस्थाएं और विश्वविद्यालय यदि छात्रों को गुमराह करते हैं या धोखाधड़ी करती हैं तो उनके संचालकों को जुर्माने के साथ-साथ तीन साल की सजा हो सकती है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने दूरस्थ शिक्षा काउंसिल विधेयक 2014 का मसौदा तैयार कर लिया है। विधेयक के मसौदे पर विभिन्न पक्षों से प्रतिक्रिया मांगी गई है। मसौदे के अनुसार दूर शिक्षा को रेगुलेट करने के लिए डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (डीईसीआई) बनेगी। इसमें चेयरमैन, वाइस चेयरमैन के अलावा शिक्षा, व्यय, अंतरिक्ष, भारी उद्योग मंत्रालयों के सचिव और एजुकेशन से जुड़ी नियामक एजेंसियों मसलन, एमसीआई,डीसीआई,एनसीटीई, नर्सिग, एआईसीटीई, यूजीसी के चैयरमैन सदस्य बनाए जाएंगे।

मसौदे के अनुसार उच्च शिक्षा खासकर दूरस्थ शिक्षा के जरिये दी जा रही उच्च शिक्षा में छात्रों को गुमराह करने, धोखाधड़ी करने, बिना मंजूरी के कोर्स चलाने की शिकायतें बढ़ रही हैं। यह भी सही है कि दूरस्थ शिक्षा से पढ़ने वालों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए इसकी निगरानी की जरूरत है। मसौदे के अनुसार काउंसिल के समक्ष छात्र शिकायत कर सकेंगे। शिकायत सही पाए जाने पर काउंसिल 50 लाख से लेकर 2.5 करोड़ का जुर्माना कर सकती है। साथ ही पूरी फीस और अन्य खर्च को छात्रों को वापस लौटाने का निर्देश देने का अधिकार होगा। यदि बड़े पैमाने पर छात्रों के साथ धोखाधड़ी हुई है तो काउंसिल ऐसे विश्वविद्यालय के खिलाफ आपराधिक मामला चलाएगी। जिसमें तीन साल की सजा का प्रावधान रखा जा रहा है।

मसौदे के अनुसार काउंसिल दूरस्थ शिक्षा के लिए मानक बनाकर अधिसूचित करेगी जिन्हें सभी विश्वविद्यालयों द्वारा मानना होगा। प्रत्येक विश्वविद्यालय को अपने कोर्स को इस काउंसिल से मंजूर करना होगा। बैगर मंजूरी के वह कोर्स नहीं चला सकता। काउंसिल विश्वविद्यालयों के कार्य क्षेत्र भी तय करेगी। अभी कोई भी विश्वविद्यालय कहीं भी कोर्स चला रहे हैं। हर विवि ने अपने-अपने हिसाब से कोर्स तैयार कर रखे हैं। अभी दूरस्थ शिक्षा के लिए कोई नियामक एजेंसी देश में नहीं है। पहले इग्नू की एक काउंसिल बनी थी उसके खुद विवादों में घिर जाने के कारण उसे भंग कर दिया गया। तब से इसे जुड़ा कार्य थोड़ा बहुत यूजीसी एवं मंत्रालय स्वयं देख रहे हैं।

मंत्रालय ने विधेयक के मसौदे पर राज्यों एवं विभिन्न मंत्रालय से प्रतिक्रिया मांगी है। सरकार की कोशिश है कि बजट सत्र में इस विधेयक को पारित कराया जाए।

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