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सीबीआई निदेशक पर और कस सकता है शिकंजा

सीबीआई निदेशक पर और कस सकता है शिकंजा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा  सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा को टू जी मामले की जांच से हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने स्थिति की समीक्षा की है। सरकार जल्दबाजी में फैसला लेने के मूड में नहीं है, क्योंकि सीबीआई निदेशक दो दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं। सरकार प्रक्रिया के तहत ही नए सीबीआई प्रमुख का चुनाव करना चाहती है। इस संबंध में शीतकालीन सत्र के शुरू में ही फैसला होना है। हालांकि माना जा रहा है कि सिन्हा के टू जी जांच से हटने के बाद उनपर शिकंजा कसा जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि जिस संदिग्ध आचरण के चलते सीबीआई निदेशक को टू जी जांच से हटाया गया है उसे देखते हुए उनसे आगे चलकर जांच एजेंसी पूछताछ भी कर सकती है। एक अधिकारी ने कहा,रिटायर होने के बाद भी सिन्हा को कुछ बिंदुओं पर जवाब देना पडम् सकता है। ऐसे में उनकी मुश्किलें काफी बढ़ जाएगी।

सीबीआई निदेशक को लेकर जांच एजेंसी के अधिकारी भी बंट गए हैं। सीबीआई के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने निदेशक की ओर से अपने ही एक अधिकारी को कथित रूप से जासूस बताए जाने पर रोष जताया है। सीबीआई निदेशक ने सफाई दी है कि उन्होंने किसी का नाम जासूस के तौर पर नहीं लिया। निदेशक सिन्हा ने अपना पद छोडम्ने का भी कोई संकेत नहीं दिया। सूत्रों के मुताबिक सिन्हा अपने रिटायरमेंट का इंतजार करना चाहते हैं। सरकार के सूत्रों ने कहा कि चंद दिन बचे हैं ऐसे में उन्हें हटाने या नहीं हटाने से बहुत फर्क नहीं पड़ेगा।

सरकार के शीर्ष नेतृत्व में नए सीबीआई निदेशक के बारे में चर्चा हुई है। केंद्र सरकार ने सीबीआई प्रमुख पद के चयन के लिए समिति में नेता प्रतिपक्ष की जगह सबसे बड़े दल के नेता को शामिल करने के लिए तय मानक में बदलाव का प्रारूप तैयार किया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह और वित्तमंत्री अरुण जेटली की प्रधानमंत्री मोदी से इस संबंध में चर्चा हो चुकी है। कानून मंत्रालय ने इस दिशा में काफी काम किया है। आखिरी फैसला प्रधानमंत्री मोदी को लेना है। सरकार शीतकालीन सत्र के पहले इस संबंध में बाधाओं को दूर कर लेना चाहती है। पुलिस इस्टैबलिसमेंट एक्ट में  जरूरी संशोधन शीतकालीन सत्र में ही लाए जा सकते हैं। इसके बाद सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।

सीबीआई में चर्चा है कि नए सीबीआई प्रमुख का चयन होने तक विशेष निदेशक अनिल सिन्हा को कार्यभार दिया जा सकता है। हालांकि मोदी सरकार का रुख वरिष्ठता क्रम के बजाए प्रभावी कामकाज पर है। सूत्रों ने कहा कि मोदी किसी चौंकाने वाले नाम पर भी फैसला कर सकते हैं।

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