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कांग्रेस शासन में हुई रामपाल के आश्रम की पौ बारह

कांग्रेस शासन में हुई रामपाल के आश्रम की पौ बारह

बरवाला के जिस सतलोक आश्रम को लेकर पिछले लगभग 2० दिनों से प्रदेशभर में हो हल्ला मचा हुआ था, उस आश्रम की कांग्रेस के हुड्डा राज में पौ बारह हुई। अधिकारियों की माने तो कांग्रेस राज में यह आश्रम पूरी तरह से फला-फूला और इसकी किसी तरह की जांच पड़ताल की जरूरत नहीं समझी गई। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चाहे कुछ भी लगते रहे हो लेकिन यह सच्चाई है कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में इस आश्रम को तमाम नियम कायदों को ताक पर रखकर आलीशान बनाया गया।

उपायुक्त एवं अन्य अधिकारियों ने मीडिया को जो जानकारी दी, वह चौंकाने वाली है। अधिकारियों की माने तो लगभग 1०-12 एकड़ में फैले इस आश्रम को इस तरह आलीशान बनाने की कोई सीएलयू या निर्माण की मंजूरी संबंधित विभागों से नहीं ली गई है। नियमानुसार इस तरह का भवन खडम करने के लिए कई विभागों की छानबीन व मंजूरी से होकर गुजरना पड़ता है लेकिन रामपाल के आश्रम के लिए सरकार एवं संबंधित विभागों के अधिकारी तमाम नियम कायदे भूल गए और अपनी आंखें बंद कर ली। सरकार की मूक सहमति के चलते रामपाल व उसके अनुयायी चुपचाप अपने भवन को आलीशान बनाते रहे।

बिजली निगम भी रहा मेहरबान
रामपाल के आश्रम पर तत्कालीन हुड्डा सरकार के साथ-साथ बिजली निगम भी कम मेहरबान नहीं रहा। आमतौर पर किसी व्यक्ति को अपने घर के लिए छोटा का कनैक्शन लेने के लिए जहां अनेक चक्कर लगाने पड़ते हैं, वहीं रामपाल के आश्रम को हाई वोल्टेज का कनैक्शन दिया गया है। इसके अलावा आश्रम में कोई ट्यूबवैल नहीं है लेकिन ट्यूबवैल के लिए भी कनैक्शन जारी किया गया है।

आहत हुई भावनाएं तो फेंके ताबीज व किताबें
आश्रम में अनेक आशाएं लेकर आए अनुयायियों की भावनाएं जब रामपाल के कृत्यों से आहत हुई तो उन्होंने भी पलभर की देर नहीं की। आश्रम से बाहर आते ही उन्होंने रामपाल के फोटो वाले ताबीज, किताबें व अन्य प्रचार सामग्री फेंकनी शुरू कर दी। हालात यह थे कि सुरेवाला चौक से हिसार तक के कई किलोमीटर के रास्ते में रामपाल के फोटो लगे ताबीज, किताबें व प्रचार सामग्री बिखरी पड़ी थी। आश्रम में आए अनुयायियों के अनुसार वे तो इस बाबा की महिला सुनकर आए थे लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

रामपाल व अन्य पर हत्या सहित धाराओं के दो केस दर्ज
सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल व अन्य पर बरवाला पुलिस थाना में हत्या व अन्य धाराओं के तहत दो अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने एक केस नई दिल्ली के बदरपुर निवासी शिवपाल पुत्र महाबीर की शिकायत पर दर्ज किया है।

शिवपाल ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि रामपाल व अन्य द्वारा बंधक बनाए जाने व क्रूरतम व्यवहार के कारण उसकी पत्नी सरिता के अलावा अन्य महिलाओं संतोष, मलकीत कौर, राजबाला व आदर्श की मौत हो गई। पुलिसने शिवपाल की शिकायत पर रामपाल, उसके भाई राजेन्द्र के अलावा प्रवक्ता राजकपूर, महेन्द्र व अन्य पर धारा 343, 3०2 व 12०बी के तहत केस दर्ज किया है। इसके अलावा पुलिस ने इन्हीं लोगों पर इन्हीं धाराओं के तहत यूपी निवासी सुरेश पुत्र गणपतराम की शिकायत पर दर्ज किया है। सुरेश ने आरोप लगाया कि इन लोगों की वजह से उसकी 25 वर्षीय पत्नी रजनी के अलावा मलकीत कौर, राजबाला व आदर्श की मौत हो गई। इन मामलों में रामपाल व अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी अभी होनी है।

लग्जरी जीवन जीने का आदि है रामपाल
रामपाल अपने समर्थकों को भले ही त्याग की शिक्षा देता हो, लेकिन खुद बहुत ही लग्जरी जीवन जीने का आदि है। उसके पास करीब 100 करोड़ रुपए की प्रापर्टी है। इसमें बरवाला का आश्रम भी शामिल है। यह करीब 16 एकड़ में फैला हुआ है।  रामपाल के आश्रम में करीब 70 गाड़ियां है। इसमें मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, एसयू वी, सीआरवी जैसी गाड़ियां भी शामिल है। उसके पास 20 ट्रैक्टर, दो ट्रक व पांच बस भी है। आश्रम पूरा किला जैसे बना हुआ है। हर कमरा वातानुकूलित है, इसमें एलसीडी लगे हैं। रामपाल जब सत्संग करता है तो एलसीडी  से उसका प्रसारण किया जाता था। आश्रम में एक समय में 50 हजार लोगों के रहने की व्यवस्था है।  यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कोई भी बाहर से सीधा अंदर नहीं आ सकता है।
 
गिरफ्तार नहीं हुआ रामपाल आत्मसमर्पण कराया
पुलिस की तमाम कोशिश के बाद भी रामपाल तक जब  सुरक्षाकर्मी नहीं पहुंच पाए तो दूसरा तरीका अपनाना पड़ा। रामपाल पर पुलिस ने दबाव बनाया। इसके साथ ही बातचीत का रास्ता भी अपनाया गया। दो विधायकों भूमिका इसमें रही। लेकिन इस सभी के बीच पुलिस के हाथ रामपाल का बेटा लग गया। पुलिस ने जब उसे धमकाया तो वह डर गया और रामपाल से बात की। इसके बाद रामपाल के तेवर ढीले पड़ गए। वह आत्मसमर्पण को राजी हो गया। जैसे ही उसने यह इच्छा जताई तो पुलिस ने तुरंत ही एंबुलेंस मंगाई। लेकिन यहां भी पुलिस ने चालाकी बरती। एक एंबुलेंस आगे और एक गाड़ी आश्रम के पीछे खड़ी की। रामपाल पीछे की गाड़ी में चुपचाप आकर बैठ गया।

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