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अब प्रचार में सोशल मीडिया को तरजीह देते हैं दल

अब प्रचार में सोशल मीडिया को तरजीह देते हैं दल

पिछले कुछ चुनावों तक मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री हेमामालिनी जब ‘चल मेरी धन्नो’ कहती तो जमा भीड़ तालियां बजाने से खुद को नहीं रोक पाती थी। इसी तरह मशहूर हास्य कलाकार असरानी अपने खास अंदाज में खुद को ‘अंग्रेजों के जमाने के जेलर’ कहते हैं तो लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाते। पर इधर जनता की दिलचस्पी इन तमाशों में कम हुई है इसलिए चुनावों में राजनीतिक दलों के प्रचार का अंदाज भी बदला है।

राजनीतिक पार्टियां अब जनसभाओं और रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए फिल्मी सितारों को सहारा नहीं लेती। इसकी जगह वह ज्यादातर लोगों तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रही है। शायद यही वजह है कि महाराष्ट्र व  हरियाणा के बाद झारखंड और जम्मू-कश्मीर चुनाव में भी फिल्मी सितारों की मांग नहीं है। मतदाता अब तब तक संतुष्ट नहीं होता जब तक उम्मीदवार से उसका परोक्ष या प्रत्यक्ष संपर्क न हो।

ऐसा नहीं है कि बॉलीवुड कलाकारों को लेकर लोगों की दीवानगी कम हो गई है। पर अब नेता ईमेज मेकर और दूसरी कैंपेन चलाने वाली एजेंसियों का सहारा लेकर खुद को ‘स्टार प्रचारक’ के तौर पर प्रोजैक्ट करने लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई मशहूर हस्तियों ने राजनीतिक दलों का दामन थामा है। इसलिए, पार्टियां अब बॉलीवुड कलाकारों को बुलाने के बजाए अपनी पार्टी के ‘स्टार से ही प्रचार कराती हैं।

कुछ वर्ष पहले तक बॉलीवुड स्टार भीड़ जुटाने का सबसे बड़ा माध्यम थे। इसके लिए पार्टियां काफी पैसा भी खर्च करती थी। भीड़ भी जुटती थी, पर राजनीतिक दल इस भीड़ को वोट में बदलने में नाकाम रहते। इसलिए, पार्टियों को अभिनेता-अभिनेत्रियों कों प्रचार के लिए बुलाने के बजाए अपनी पार्टी में शामिल करना ज्यादा बेहतर विकल्प लगा।

सोशल मीडिया ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया के जरिए जनसभाओं और रैलियों में भीड़ जुटाने के साथ उसे वोट में भी बदला जा सकता है। इसलिए, राजनीतिक दलों ने लोकसभा के बाद हुए चुनाव में सोशल मीडिया पर प्रचार को ज्यादा तरजीह दी है। इसके लिए स्वयंसेवकों की एक ‘फौज’ तैयार की है।

बॉलीवुड अभिनेता-अभिनेत्रियों को लेकर लोगों की सोच में कोई खास बदलाव नहीं आया है। उन्हें देखने के लिए अभी भी भीड़ जुटती है। सियासी पार्टियों ने अपनी रणनीति बदली है। पिछले कुछ वर्षों में कई फिल्मी सितारे भी विभिन्न पार्टियों में शामिल हुए हैं। इसके अलावा चुनाव प्रचार में तकनीक का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है।
- संजय कुमार, निदेशक- सेंटर फॉर द इंडस्ट्री ऑफ डवलपिंग सोसाइटीज

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