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वायदा कारोबार का स्याह पक्ष!

वायदा कारोबार अवैध भंडारण का मान्य बाजारू कारोबार है। इसमें कारोबारी कई बार अपने हिसाब से दामों में बनावटी उछाल एवं गिरावट की स्थिति पैदा करते हैं। महंगाई को लेकर सरकारी प्रयास भी ‘नौ दिन चले, अढ़ाई कोस’ वाली है। अभिजीत सेन कमेटी की रिपोर्ट भी सच से मुंह चुरानी वाली है। ऐसे में मेरी स्पष्ट मान्यता है कि महंगाई को लेकर देश में व्याप्त निराशा का माहौल समाप्त करने के लिए जरूरी है कि मनुष्य को जीने के लिए जरूरी अन्न एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद-बिक्री में वायदा कारोबरी का प्रवेश नहीं होना चाहिए कारण कि इससे मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिलता है। महंगाई की कीमत पर विकास की खोखली सोच कतई न्यायसंगत नहीं हो सकती।ड्ढr हर्षवर्धन कुमार, पूर्वी लोहानीपुर, पटनाड्ढr नई ऊंचाई दीड्ढr महंगाई के जमाने में आम आदमी की भला कौन सुनता है। ऐसे में आपने पाठकों की राय को पहले से ज्यादा महत्व देकर लोगों के लिए अपनी बात कहने के मंच को नई ऊँचाई दी है। इससे लोगों की आवाज सरकार तक ज्यादा जोर से पहुंचेगी।ड्ढr इम्तियाज, निजामुद्दीन वेस्ट, नई दिल्लीड्ढr ये एसे सुधरंगेड्ढr देश की आर्थिक नीतियां बनाने वालों को बीपीएल कार्ड दे दिए जाएं और उन्हें गांव के गरीबों के साथ राशन की दुकान की लाइन लग कर अपने लिए कंकड़ मिला गेहूं और चावल खरीदना और खाना पड़े। अगर यह हो सके, तो बहुत सी समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएंगी। इसी तरह शिक्षा विभाग के अफसरों और मंत्रियों को दूरदराज के गांवों में ले जाकर मिड डे मील का खाना खिलाया जाए। अगर यह पौष्टिक होता है तो उन्हें सचमुच फायदा होगा। वर्ना शायद बच्चों का फायदा हो जाए।ड्ढr नवेंदु कुमार, कड़कडड़ूमा, दिल्लीड्ढr डरो कि जनता आती हैड्ढr पहले महंगाई बाकी दुनिया में थी अब भारत में भी है। इसी से डर लगता है। इस समय दुनिया के कई देशों में खाने-पीने के सामान को लेकर दंगे हो रहे हैं। हम चाहें तो इसमें अपना भविष्य देख सकते हैं। इसलिए जो नेता यह बात कर रहे हैं कि महंगाई पूरी दुनिया भर में है इसलिए भारत में है तो क्या हुआ उन्हें अभी से सचेत हो जाना चाहिए। ऐसे ही कारणों से दुनिया के कई देशों में लोगों ने सरकार को पलटा है और नेताओं की बुरी गत बनाई है।ड्ढr अमन रावत, बुलंदशहरड्ढr बीच राह में फंसी तरक्कीड्ढr दिल्ली की सारी तरक्की बीआरटी कॉरिडोर में फंस गई है। बसें चढ़ने लायक नहीं हैं। बाकी बची सड़क में फंस कर आप समय पर कहीं पहुंच नहीं सकते। मेट्रो हर जगह जाती नहीं है। क्या इन्हीं सड़कों पर फंसकर देश सन् 2020 तक सुपर पॉवर बनेगा, पर जब देश की राजधानी में लोगों के घर तक पहुंचाने लायक पॉवर भी नहीं है।ड्ढr पूर्णिमा वाजपेयी, पंजाबीबाग, नई दिल्लीड्ढr बीआरटी नहीं, मेट्रो चाहिएड्ढr मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि वे बीआरटी जसी योजनाओं के चक्कर में पड़कर लोगों को परशान करने के बजाय मेट्रो जसी योजना पार दुगनी गति से ध्यान दें। जहां मेट्रो नहीं पहुंची है, वहां उसे पहुंचाएं। अभी दिल्ली की अस्सी फीसदी आबादी मेट्रो की सुविधा से वंचित है। क्या इन लोगों के वोट शीला दीक्षित को नहीं चाहिए? इसके अलावा बहुत से फ्लाईओवर रुके पड़े हैं, इन्हें भी बनवाना बहुत जरूरी है।ड्ढr पूरन जलोटा, गाजीपुर, नई दिल्ली

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