DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

श्रद्धा और अंधविश्वास

हमारे भारत में प्राचीन समय से ही धर्म, गुरुओं और साधु-संतों के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा रही है। लेकिन जब यह आस्था अंधविश्वास में बदल जाती है, तो इसके कितने भयानक परिणाम हो सकते हैं, आस्था की आग में सुलग रहा हिसार इसी का एक उदाहरण है। इससे पूर्व भी बहुत सारे कथित बाबाओं और धर्मगुरुओं के काले कारनामे सामने आते रहे हैं, फिर भी 21वीं सदी के हमारे पढ़े-लिखे हाईटेक समाज का इन पर अंधविश्वास बढ़ता जा रहा है। ये कथित बाबा धर्म व आस्था की आड़ में दुष्कर्म, हत्या, लूटपाट और दंगे-फसाद जैसे कारनामों के अंजाम देते हैं और कई बार सच्चाई उजागर होने के बाद भी ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई न होना ऐसे अनेक लोगों को जन्म भी देता है। लेकिन हम ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई न होने के लिए राज्य या केंद्र सरकार को ही दोष नहीं दे सकते, क्योंकि हम लोग ही ऐसी कार्रवाई को अपने जीने-मरने का प्रश्न बना लेते हैं।
विकास राणा, चिराग दिल्ली, नई दिल्ली

स्वविवेक से वोट दें
यह झारखंड राज्य के लिए विडंबना है कि इसके गठन के समय यहां के लोगों की जो उम्मीदें थीं, वे सिसक-सिसक कर दम तोड़ती जा रही हैं। इसके लिए जितनी जिम्मेदार यहां की सरकारें रही हैं, उतनी ही जिम्मेदार यहां की जनता भी है, जो हर बार नीतिहीन व दल-बदलू नेताओं के झूठे वादों के भंवरजाल में फंस जाती है। झारखंड में हर बार यह हवा बनाया जाता है कि किसी ‘विशेष’ पार्टी को बहुमत मिल रहा है, ‘उसकी’ ही सरकार तय है। नतीजतन, भोली जनता अपना कीमती वोट स्थायी सरकार की चाहत में बिना सोचे दे देती है, लेकिन हर बार उसे पूर्ण बहुमत वाली सरकार के बदले सौदेबाजी वाली सरकार मिलती है। इसलिए इस बार बिना चुनावी हवा से प्रभावित हुए स्वविवेक से मतदान करने की आवश्यकता है।
मनीष कुमार सिन्हा
झुमरी तिलैया, झारखंड

आबादी का बोझ
पिछले दस वर्षों में दिल्ली शहर में कई फ्लाईओवर का निर्माण हुआ। दूसरी तरफ, मेट्रो ने बसों व निजी वाहनों का बोझ बहुत कम किया। फिर भी ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। इसके मूल में बढ़ती हुई जनसंख्या है, इस बात को सरकारें और लोग समझना नहीं चाहते। किसानों के शहर पलायन और बेरोजगारी से पनपे अपराधीकरण को रोकना भी जनसंख्या नियंत्रण के बिना संभव नहीं है। नई सरकार पश्चिमी देशों के सुंदर शहरों की तर्ज पर अपने यहां शहर विकसित करने के सपने देख और दिखा रही है। यह अच्छी बात है, लेकिन हमें व सरकार, दोनों को यह देखना चहिए कि हमारे यहां जनसंख्या का घनत्व उन देशों से कई गुना है। क्या इस घनत्व के साथ वैसा विकास संभव है? यदि नहीं, तो क्या जड़ से शुरुआत करना बेहतर नहीं होगा? इसके लिए इससे बेहतर समय और कोई नहीं हो सकता। यह सरकार बड़ी बहुमत के साथ आई है, इसलिए जनहित में कड़े फैसले ले सकती है। यह सही समय है कि जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में कोई ठोस कानून बनाया जाए।
भावना प्रकाश

अपने बनते दुश्मन
लड़की के लिए सुरक्षित स्थान उसका घर या माता-पिता के साथ रहना होता है। मगर हाल के मामलों से यह सोच कई तरह से गलत साबित हो रही है। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने बलात्कार के जो 1,704 केस बताए, उनमें चिंता की बात यह है कि 43 केस ऐसे हैं, जिनमें बलात्कार करने वाला पिता है और 27 केस ऐसे हैं, जिनमें बलात्कारी पीड़िता का सगा भाई है। आंकड़े के मुताबिक, महज 4.23 प्रतिशत ऐसे केस दर्ज किए गए हैं, जिनमें बलात्कारी कोई अनजान व्यक्ति था। इन सबसे यह भी पता चलता है कि खुली सड़के युवतियों-बच्चियों के लिए खतरनाक तो हैं, लेकिन घर की चारदिवारी भी कम खतरनाक नहीं है। क्या इस समस्या  से निकलने का कोई हल नजर आता है?
ब्रह्मरूप दीक्षित, नई दिल्ली

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:श्रद्धा और अंधविश्वास