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ईश्वर सिंह ने बंधुआ मजदूर मुक्त कराए जाने पर जताया संतोष

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने गया पुलिस के रवैये पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने गया पुलिस को नोटिस देकर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार को गया जिले की समीक्षा में पहुंचे आयोग के सदस्य ने बताया कि समीक्षा में आए पुलिस अधिकारी के पास अधूरी जानकारी थी। जिले में दुष्कर्म की संख्या कितनी है? पीड़ितों को मुआवजा की राशि मिली की नहीं? प्राथमिकी दर्ज करने और मेडिकल कराने में कितना अंतराल था? इनमें से किसी सवाल का अधिकारी के पास संतोषजनक जवाब नहीं था। गौरकाबिल है कि सीएम के आगमन के कारण एसएसपी निशांत कुमार तिवारी आयोग के सदस्य की समीक्षा में नहीं पहुंच सके थे।
                      
ईश्वर सिंह ने कहा कि एससी-एसटी मामलों में प्रशासन को और गंभीर होने की जरुरत है। समीक्षा के दौरान भूमि आवंटन और इंदिरा आवास से अधिकतर मामले आए। उन्होंने कहा कि इंदिरा आवास देने में समय सीमा निर्धारित होनी चाहिए। पूरे देश में दलितों की स्थिति दयनीय है। दलितों को बराबरी का हिस्सा नहीं मिलता। समाज के रवैये में भी बदलाव की आवश्यकता है। आयोग के सदस्य के रूप में ईश्वर सिंह के पास बिहार, बंगाल, हिमाचल, हरियाणा और दिल्ली की जिम्मेवारी है। ईश्वर सिंह ने शुक्रवार को पटना में एससी/एसटी मामलों की समीक्षा करेंगे।

बंधुआ मजदूर मुक्त कराए जाने पर खुशी
आयोग के सदस्य ने जिले में बंधुआ मजदूरों के मुक्त कराए जाने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सीएम दलित वर्ग के हैं। ऐसे में बंधुआ मजदूरों का मुक्त कराए जाने का क्रेडिट उनको मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में शून्य, 2013 में 53 और 2014 में 183 बंधुआ मजदूर मुक्त कराए गए।

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