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कोई खुश, कोई नाखुश

प्रमुख उद्योग मंडलों ने रिजर्व बैंक की तरफ से मंगलवार को 2008-0े लिए घोषित र्का एवं मौद्रिक नीति पर मिली जुली राय व्यक्त की है। फिक्की ने कहा है कि अर्थव्यवस्था पर तमाम मुद्रास्फीतिकारी दबावों के बावजूद रिजर्व बैंक की दरों में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं किया जाना स्वागतयोग्य कदम है। फिक्की के अध्यक्ष और सांसद राजीव चंद्रशेखर ने नीति पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि मौजूदा मंहगाई का रुख मुख्यत वैश्विक दबाव के कारण है।ऐसे में ब्याज दरों में बढ़ोतरी से मंहगाई को काबू में कर पाना किसी भी तरह प्रभावकारी नहीं होगा। उधर, सीआईआई ने कहा कि नगद सुरक्षित अनुपात (सीआरआर) में चौथाई प्रतिशत वृद्धि किए जाने से बैंकों पर कोई विशेष फर्क नहीं पड़ेगा। कम जोखिम वाले निजी होम लोन की सीमा को 20 से 30 लाख किए जाने का भी स्वागत किया गया। पर पीएचडी चैम्बर आफ कामर्स ऐंड इंडस्ट्रीज ने सीआरआर में बढ़ोतरी को विकास के रास्ते की अड़चन बताया। मंडल के अध्यक्ष एल के मल्होत्रा ने कहा कि कुछ समय पहले ही रिजर्व बैंक ने सीआरआर में आधा प्रतिशत की वृद्धि की थी। इसके बाद चौथाई प्रतिशत की और वृद्धि किए जाने से बैंकिग तंत्र से 000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि कम हो जाएगी। इससे अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों को लोन लेने में कठिनाई आएगी। श्री मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्व बैंक के इस कदम से अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों की लाभप्रदता पर असर पडेगा और उन्हें मजबूरन ब्याज दरें बढानी पडेगीं। इस कदम से रिण की मांग कम होने के साथ-साथ निवेश और खपत भी बुरी तरह प्रभावित होगी।ड्ढr

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