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‘लाभ के फिराक में ही न रहे उद्योग’

प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने देश के उद्योग जगत से कहा कि वे सिर्फ मुनाफा कमाने की ही न सोचे। वे अपनी बढ़ी हुई लागत के बोझ को अपने कस्टमरों की जेब से न निकाले। प्रधानमंत्री ने यह नसीहत मंगलवार को उद्योग और वाणिज्य संगठन सीआईआई के सालाना सम्मेलन के दौरान दी। उन्होंने दो टूक शब्दों मे कहा कि वक्त का तकाजा है कि इंडिया इंक अपने सामाजिक दायित्वों का भी निर्वाह कर। सरकार ने तो हाल के दिनों में महंगाई को रोकने के लिए तमाम तरह की कोशिशें की हैं, अब बारी उद्योग जगत की है। इशारों- इशारों में डा. मनमोहन सिंह ने यह भी कह दिया कि वे चाहेंगे कि उद्योग जगत अपने अनाप-शनाप खचरे पर रोक लगाए। ऐसा करके भी वे महंगाई पर काबू पाने में मदद कर सकते हैं। महत्वपूर्ण है कि पिछले साल भी प्रधानमंत्री ने इसी मंच से देश के उद्योग की दुनिया की नामवर हस्तियों को सलाह दी थी कि वे (पढ़े सीईओ) अपनी सेलरी को आसमान पर न ले जाएं। उनके उस वक्तव्य पर तब खूब बवाल भी मचा था। प्रधानमंत्री के भाषण में शिक्षा क्षेत्र पर खासा फोकस रहा। उन्होंने कहा कि मैंने 11वीं पंचवर्षीय योजना को नेशनल एजुकेशन प्लान कहा है। हमने शिक्षा क्षेत्र के अपने बजट में तगड़ा इजाफा भी किया है। यह तो पहला कदम है। पर देश में सब को तालीम की रोशनी देने का काम सिर्फ सरकार ही नहीं कर सकती। हमें इस लिहाज से प्राइवेट सेक्टर के अतिरिक्त सहयोग की अपेक्षा है। प्रधानमंत्री खाद्य संकट और जलवायु परिवर्तन पर भी संक्षेप में बोले। खाद्य संकट पर उनका कहना था कि बाहरी कारणों के चलते भी यह स्थिति बनी। पर विश्व समुदाय का इस बार में रवैया ठंडा ही रहा। खाद्य फसलों के स्थान पर बायो फ्यूल की खेती के बढ़ने चलन के कारण भी खाद्य संकट की हालत पैदा हुई। उनके सारगर्भित भाषण को इंडिया इंक की चोटी की हस्तियों ने बड़ी तन्मयता से सुना। बाद में पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए सीआईआई के निवर्तमान अध्यक्ष सुनील भारती मित्तल ने कहा कि उद्योग जगत हर मामले में सरकार के साथ मिल कर काम करना चाहता है। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत सरकार को महंगाई रोकने और शिक्षा के प्रसार में हर सम्भव सहयोग करगा और कर भी रहा है।

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