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यूपी सरकार ने जजों की नियुक्ति का अधिकार मांगा



यूपी सरकार ने जजों की नियुक्ति का अधिकार मांगा है। इससे संबंधित संकल्प बुधवार को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया। संकल्प के अनुसार यूपी में जजों की नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री, नेता विपक्ष और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कमेटी बने। खास बात यह है कि सदन में सपा के इस संकल्प का बसपा और कांग्रेस ने भी समर्थन किया।

सरकार की ओर से संकल्प वरिष्ठ मंत्री अंबिका चौधरी ने पेश किया। उन्होंने कहा कि वह केंद्र सरकार द्वारा जजों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम सिस्टम समाप्त करने के पक्षधर हैं लेकिन राज्यों में हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति का यह अधिकार मुख्यमंत्री, नेता विपक्ष और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कमेटी का होना चाहिए। इस शर्त के साथ उन्होंने केंद्र सरकार के 121वें संविधान संशोधन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज कहते हैं कि निचली अदालतों में भ्रष्टाचार है। इस तरह नियुक्ति की प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार समाप्त होगा।

भाजपा के डा.राधा मोहन दास अग्रवाल ने यूपी सरकार की शर्त का विरोध किया। उन्होंने केंद्र सरकार के संविधान संशोधन के विधेयक को मूल रूप में पारित करने का संशोधन पेश किया। उन्होंने संकल्प का समर्थन करने वाली बसपा, सपा और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि  मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा और प्रो.राम गोपाल यादव ने राज्यसभा में विधेयक का समर्थन किया। फिर विधानसभा में इसका विरोध क्यों किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि बसपा की नेता मायावती और सतीश चंद्र मिश्र ने भी राज्यसभा में इस विधेयक का समर्थन किया। इसी तरह कांग्रेस के नेता मल्लिकाजरुन खड़गे ने इसका समर्थन किया। फिर वे इस विधेयक का विरोध करके अपने राष्ट्रीय नेतृत्व को ही चुनौती दे रहे हैं। यह दोहरे आचरण का प्रतीक और अद्भुत राजनीति का चरित्र है।

नेता विपक्ष बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और कांग्रेस के नेता प्रदीप माथुर ने सपा सरकार के संकल्प का समर्थन किया। बहरहाल, सदन द्वारा भाजपा का संशोधन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया गया।

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