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मायावती शासनकाल में लखनऊ और नोएडा के स्मार्कों पर नोटिस

मायावती शासनकाल में वर्ष 2007 से वर्ष 2012 के बीच लखनऊ और नोयडा में बनाए गए स्मारकों और पार्को में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच कराए जाने की मांग को लेकर दायर एक याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सरकार के प्रमुख सचिव वित्त और लोक निर्माण सहित विभागों को नोटिस जारी की है और उन्हें चार सप्ताह में याचिका पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका पर अगली सुनवायी 15 जनवरी को होगी।
मुख्य न्यायाधीश डॉ. धनंजय यशवंत चन्द्रचूड़ तथा न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की खण्ड पीठ ने उप्र. राज्य निर्माण निगम, सिंचाई और पीडब्लूडी विभाग के इंजीनियर इन चीफ सहित एलडीए के उपाध्यक्ष तथा नोयडा के उपाध्यक्ष से भी जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता शिवसेना के प्रदेश प्रवक्ता भारत नाथ शुक्ला ने अपनी याचिका में हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती सहित, कैग, लोकायुक्त तथा पब्लिक अण्डर टेकिंग कमेटी के चेयरमैन को पक्षकार बनाया है।

याचिकाकर्ता के वकील हरिशंकर जैन ने याचिका के साथ कैग और उप्र के लोकायुक्त द्वारा की गई घोटाले की जांच रिपोर्ट को संलग्न करते हुए आरोप लगाया है कि एक तरफ जहां कैग ने इन स्मारकों और पार्को की ऑडिट जांच में भारी अनियमितताएं पायी हैं और सरकारी धन के खुले दुरुपयोग की बात सच पायी है। वहीं लोकायुक्त ने भी इन स्मारकों और पार्को की कार्यदायी संस्थाओं द्वारा निर्माण के दौरान 1400 करोड़ रुपए से ज्यादा की धांधली के आरोप को जांच में सच पाया है। लेकिन लोकायुक्त द्वारा प्रदेश सरकार को भेजी गई जांच रिपोर्ट पर अभी तक सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि यह जनता की गाढ़ी कमायी का दुरुपयोग का अपराध है।


स्मारकों के निर्माण में धांधली का आरोप लगाते हुए उन्होंने लखनऊ स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, मान्यवर श्री काशीराम जी स्मारक स्थल, बौद्ध विहार शान्ती उपवन, इको पार्क एवं मान्वयर श्री काशीराम जी ग्रीन गार्डेन इसके अलावा नोयडा स्थित राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल तथा ग्रीन गार्डेन का उल्लेख किया है। श्री जैन की दलील थी कि यह सारे स्मारक तथा पार्क सरकारी खजाने तथा बजट की स्वीकृति मिलने के पश्चात बनाए गए हैं और बजट का प्रस्ताव पारित करने में तत्कालीन सरकार के कई ताकतवर मंत्री शामिल रहे हैं।

इसके अलावा इन सब की मुखिया तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इन बजटों की स्वीकृति प्रदान की थी। न सिर्फ इतना ही बल्कि वह स्वयं इन पूरे निर्माण कार्य की व्यक्तिगत निगरानी करती थी और उन्हीं की देखरेख में यह सारे निर्माण कराए गए। श्री जैन की दलील थी कि इस निर्माण कार्य में चीजों के दाम उपयोग में लगने वाली निर्माण सामाग्री के अलावा पत्थर आदि निश्चित दर से कई गुना बढ़े दामों पर खरीदे गए और इस काली कमायी में तमाम विभाग के आला अधिकारियों समेत मंत्रियों ने बंदरबांट की। जिसकी निष्पक्ष जांच कराया जाना आवश्यक है।

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  • Web Title:मायावती शासनकाल में लखनऊ और नोएडा के स्मार्कों पर नोटिस