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जम्मू-कश्मीर में राजनाथ ने की चुनावी रैली

जम्मू-कश्मीर में राजनाथ ने की चुनावी रैली

केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से आए शरणार्थियों को लुभाने का कार्यक्रम चुनाव में मिशन 44 के तहत तैयार किया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पीओके से आए शरणार्थियों के समान हक का मसला जम्मू कश्मीर में उठाया है। लेकिन इसका होमवर्क केंद्र में सरकार बनने के बाद ही शुरु हो गया था। अगस्त महीने में ही गृहमंत्रालय की ओर से विभिन्न महकमों को पत्र भेजकर पुनर्वास नीति में पीओके से आए शरणार्थियों के लिए प्लान बनाने को कहा गया था। इस पत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा पर बने टास्क फोर्स की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा गया था कि पीओके से देश में आकर शांतिपूर्ण जीवन बिताने की मंशा जाहिर करने वाले युवाओं के लिए पुनर्वास नीति को बिना देरी के अमल में लाना चाहिए।

सरकार का मानना है कि अगर कश्मीर में मिशन 44 को आगे बढमना है तो यह व्यापक कार्ययोजना के जरिए ही हो सकता है। इसके लिए सरकार कश्मीरी युवाओं के प्रति हीलिंग टच की नीति अपना रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद ही इस योजना पर काम शुरु कर दिया था। इसी रणनीति के तहत सरकार की ओर से घाटी में विवादित मुद्दों से परहेज करते हुए विकास और सुशासन को ही मुद्दा बनाया जा रहा है।

क्या है सरकार की योजना
सरकार चाहती है कि बहकावे का शिकार होकर पीओके गए युवाओं को भी मुख्यधारा में लौटने का मौका देना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि जब सरकार नक्सलियों को शांति का रास्ता अपनाने का मौका देना चाहती है। तो अगर कश्मीरी युवा किसी कारणवश रास्ते से भटक गए थे और अब शांतिपूर्ण जीवन जीने को इच्छुक हैं तो उन्हें भी एक मौका जरूर देना चाहिए।

क्या है योजना
गृहमंत्रालय की ओर से अगस्त में भेजे गए पत्र में कहा गया था कि पीओके से लौटकर शांतिपूर्ण जीवन की इच्छा जताने वाले युवाओं के लिए पुनर्वास नीति पर जल्द अमल की जरूरत है। पत्र में कहा गया था कि इस सिफारिश को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की संस्तुति मिली हुई है। गृहमंत्रालय ने इस सिफारिश से सहमति जाहिर करते हुए कहा था कि राज्य सरकार से कहा गया है कि वे पीओके से वापस आने वाले युवाओं को चिन्हित इलाकों में तीन माह तक रखकर उनकी काउंसलिंग का इंतजाम करें। राज्य सरकार से इनके पुनर्वास की योजना बनाने के बारे में भी सुझाव मांगे गए थे। केंद्र के सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार ने इस दिशा में कुछ खास नहीं किया है इसलिए अब केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर इस कार्ययोजना को अंतिम रूप देने पर विचार कर रही है। केंद्र का वादा है कि अगर राज्य में भी भाजपा की सरकार बनी तो इस नीति पर तुरंत अमल का प्रयास होगा।

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