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कैसी बनेगी दिल्ली विश्वस्तरीय

मांस की दुकानों से निकलने वाले दूषित सीधे में नाले में बहाए जाने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नारजगी जाहिर की। हाईकोर्ट ने इस बाबत कुछ तस्वीरों को देखने के बाद न सिर्फ यमुना नदी की सफाई बल्कि दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने के सपने पर भी सवाल खड़े किए। हाईकोर्ट ने इस बाबत कुछ तस्वीरों को देखने के बाद दिल्ली सरकार, जल बोर्ड और नगर निगम को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि तो आप लोग ऐसे दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाएंगे।

जस्टिस बी.डी. अहमद और सिद्धार्थ मृदुल की पीठ ने कहा कि ‘यदि सब कुछ ऐसे ही चलता रहा तो दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने का सपना कैसे पूरा होगा।’ हाईकोर्ट ने अब इस मामले में विस्तार से सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है। साथ ही सरकार, जल बोर्ड और नगर निगम से इस पर जवाब देने को कहा है। हाईकोर्ट ने यह आदेश साउथ एक्स भाग-एक के रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव मंजित सिंह चुग की ओर से पेश तस्वीरों को देखने के बाद दिया है। उन्होंने दर्जनों तस्वीरें पेश करते हुए कहा कि निजामुद्दीन, आईएनए और कोटला इलाके में चल रहे मीट शॉप में दूषित पानी को सीधे नाले में बहा दिया जाता है।साथ ही कहा कि और कुशक नाले के जरिए यह पानी यमुना नदी में जा रहा है। गंदे नालों के पानी को शोधित किए बगैर यमुना नदी में बहाए जाने पर हाईकोर्ट ने पिछले बुधवार को भी सरकार, जलबोर्ड व अन्य संबंधित निकायों को कड़ी फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि उचित ड्रैनेज प्रणाली के अभाव में यमुना नदी का पानी जहरीला हो गया है। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने कहा था कि स्थिति इतनी खराब हो गई है कि यमुना नदी का पानी जीव-जंतुओं के पीने लायक नहीं बचा है तो आखिर इस पानी को पीकर इंसान कैसे सुरक्षित रह सकता है।

वहीं पीठ ने इस मामले में पिछले आदेश के अनुरूप ड्रैनेज मास्टर प्लान बनाने में जुटे आईआईटी दिल्ली के प्रो. ए.के. गोसांई को पेश होने की सूचना नहीं देने के लिए दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू होते ही सरकार से जानना चाहा कि प्रो. गोसांई कहा हैं तो इसके जवाब में बताया गया कि वे आज पेश नही होंगे। इस पर याचिकाकर्ता चुग ने कहा कि प्रो. गोसांई इसलिए आज पेश नहीं हो सकते क्योंकि कोर्ट के आदेश के बारे में उन्हें अवगत नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रो. गोसांई से फोन पर बात हुई है और उन्होंने बताया कि कोर्ट में पेशी के लिए उन्हें कोई जानकारी नहीं है। हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए अगली सुनवाई 26 नवंबर को प्रो. गोसांई की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

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