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शेयर बाजार का लाभ बड़ी कंपनियों को

शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर वर्ष 2008 के पहले तिमाही के नतीजों में ही दिखाई देने लगा है। अपने कार्पोरट एम्पायर पर से नियंत्रण खोने के डर ने छोटी और मंझले स्तर की कम्पनियों को सोच में डाल दिया है। इन कम्पनियों को मार्केट में प्राइस वैल्यू और अपना वजूद बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ये कम्पनियां (विशेषकर मिड-साइज कम्पनियां) बड़ी कम्पनियों के कूटनीतिक तरीके से किए जा रहे अधिग्रहण से परशान हैं। शेयर बाजार की गिरावट से जहां छोटी कम्पनियां परशान हैं, वहीं बड़ी कम्पनियां इस मौके का फायदा उठाने से नहीं चूक रही हैं। पहली बार दिसम्बर 2007 में डीसीएम श्रीराम को इस तरह की परिस्थिति से गुजरना पड़ा था। एच बी स्टॉकहोल्डिंग्स ने डीसीएम श्रीराम के अधिग्रहण का प्रयास किया था लेकिन बाद में डीसीएम श्रीराम को इस परिस्थिति से बचने के लिए वारण्ट इश्यू करने पड़े थे। ताजा घटनाक्रम में चेन्नई स्थित ऑर्चिड केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स को भी कुछ एसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा है। ऑर्चिड केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स मल्टीनेशनल कम्पनी रैनबेक्सी के द्वारा खरीदे जाने की वजह से चर्चा में है। डीसीएम श्रीराम और ऑर्चिड केमिकल्स दोंनो ही आला स्तर की कम्पनियां मानी जाती हैं।

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